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एमएसबीवाई को लगा रहे पलीता
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Sat, 14 Jan 2017 10:18 PM IST
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मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना पर अस्पताल प्रबंधन पलीता लगा रहे है। कार्डधारक परिवारों के पात्र मरीज के इलाज के बदले में अस्पताल प्रबंधन पूरा धन जमा करा रहे हैं। मरीजों के परिजन कार्ड होने की दुहाई लगा रहे है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन मानने को तैयार नहीं। मामला जौलीग्रांट स्थित हिमालयन अस्पताल का है। किडनी का इलाज करा रहे ज्वालापुर निवासी शादाब के कार्ड को अस्पताल प्रबंधन मानने को तैयार नहीं है। उच्च अधिकारियों को शिकायत करने के बाद अस्पताल प्रबंधन कार्ड से इलाज के लिए तैयार हुआ।
ज्वालापुर के मोहल्ला कैथवाड़ा निवासी खुशनसीब के पुत्र शादाब को किडनी की बीमारी है। उसे इलाज के लिए तीन दिन पहले जौलीग्रांट स्थित हिमालयन अस्पताल में भर्ती किया गया। अस्पताल में भर्ती कराते समय शादाब के परिजनों से 6 हजार रुपये जमा कराए गए। शादाब के पिता खुशनसीब ने बताया कि शनिवार सुबह को उनसे 10 हजार रुपये जमा करने को कहा गया। उन्होंने बताया कि रुपये जमा करने के बजाय एमएसबीवाई का कार्ड जमा करने को देने पर स्टाफ ने उनका कार्ड नहीं लिया। मामले की शिकायत एमएसबीवाई के सीनियर प्रोग्राम ऑफिसर डा. एचएस मर्तोलिया से की गई। तब उन्होंने एडिशनल प्रोग्राम ऑफिसर डा. अमित शुक्ला से जांच कर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। जिस पर डा. अमित शुक्ला ने जौलीग्रांट अस्पताल का अकाउंट चेक करते हुए कोई पुराना बकाया न होने पर अस्पताल प्रबंधन से वार्ता की। डा. शुक्ला ने अस्पताल का नाम एमएसबीवाई के पैनल से हटाने की चेतावनी दी। इसके बाद प्रबंधन ने मरीजों को कार्ड का लाभ देना शुरू किया।
हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट के प्रबंधन से वार्ता की गई। उनका कोई पुुराना बकाया नहीं है। प्रबंधन ने बताया कि किसी स्टाफ एवं कार्ड धारक के सामंजस्य में कमी होने से ऐसा हो रहा है। प्रबंधन ने स्टाफ पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है और मरीज की शिकायत पर कार्ड से ही लाभ देने को निर्देश दिए है। अन्य पात्र मरीजों के इलाज भी कार्ड के माध्यम से करने को कहा है। -डा. अमित शुक्ला, एडिशनल प्रोग्राम ऑफिसर, एमएसबीवाई।
ज्वालापुर के मोहल्ला कैथवाड़ा निवासी खुशनसीब के पुत्र शादाब को किडनी की बीमारी है। उसे इलाज के लिए तीन दिन पहले जौलीग्रांट स्थित हिमालयन अस्पताल में भर्ती किया गया। अस्पताल में भर्ती कराते समय शादाब के परिजनों से 6 हजार रुपये जमा कराए गए। शादाब के पिता खुशनसीब ने बताया कि शनिवार सुबह को उनसे 10 हजार रुपये जमा करने को कहा गया। उन्होंने बताया कि रुपये जमा करने के बजाय एमएसबीवाई का कार्ड जमा करने को देने पर स्टाफ ने उनका कार्ड नहीं लिया। मामले की शिकायत एमएसबीवाई के सीनियर प्रोग्राम ऑफिसर डा. एचएस मर्तोलिया से की गई। तब उन्होंने एडिशनल प्रोग्राम ऑफिसर डा. अमित शुक्ला से जांच कर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। जिस पर डा. अमित शुक्ला ने जौलीग्रांट अस्पताल का अकाउंट चेक करते हुए कोई पुराना बकाया न होने पर अस्पताल प्रबंधन से वार्ता की। डा. शुक्ला ने अस्पताल का नाम एमएसबीवाई के पैनल से हटाने की चेतावनी दी। इसके बाद प्रबंधन ने मरीजों को कार्ड का लाभ देना शुरू किया।
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हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट के प्रबंधन से वार्ता की गई। उनका कोई पुुराना बकाया नहीं है। प्रबंधन ने बताया कि किसी स्टाफ एवं कार्ड धारक के सामंजस्य में कमी होने से ऐसा हो रहा है। प्रबंधन ने स्टाफ पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है और मरीज की शिकायत पर कार्ड से ही लाभ देने को निर्देश दिए है। अन्य पात्र मरीजों के इलाज भी कार्ड के माध्यम से करने को कहा है। -डा. अमित शुक्ला, एडिशनल प्रोग्राम ऑफिसर, एमएसबीवाई।
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