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जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनावी बिगुल बजा
hridwar uttrakhanda india
Updated Wed, 27 Apr 2016 12:08 AM IST
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हरिद्वार। चार महीने से चल रहे कयासों और जिला पंचायत सदस्यों की घेराबंदी का दौर अब और तेज होने वाला है। राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला पंचायत के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव की अधिसूचना जारी करने के साथ ही कार्यक्रम भी घोषित कर दिया है। नामांकन छह मई और मतदान और मतगणना 13 मई को की जाएगी।
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जिला निर्वाचन अधिकारी हरबंस सिंह चुघ ने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से मंगलवार को अधिसूचना और कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। जिला पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनावों के लिए नामांकनपत्र छह मई को जमा किए जाएंगे। सात मई को जांच की जाएगी। नाम वापसी दस मई को होगी। 13 मई को मतदान होगा और मतगणना भी उसी दिन की जाएगी। कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई है। विभिन्न दलों की ओर से अभी से ही जिला पंचायत सदस्यों की घेराबंदी भी शुरू कर दी गई है। गौरतलब है कि दिसंबर और जनवरी में जिला पंचायत के सदस्यों के चुनाव हो चुके थे। जिले के 47 जिला पंचायत सदस्य अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करेंगे।
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कांग्रेस और बसपा है प्रमुख दावेदार
हरिद्वार। चुनाव में प्रमुख रूप से कांग्रेस और बसपा अध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदार हैं। सबसे ज्यादा संख्या निर्दलीय सदस्यों की 17 है। जबकि बसपा के 16 भाजपा के तीन और कांग्रेस के 11 सदस्य जीत कर आए हैं। कांग्रेस की ओर से पंचायत की राजनीति के दिग्गज पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र चौधरी और उनकी पत्नी कुसुम देवी दोनों ही इस बार सदस्य पद का चुनाव हार गए थे अब उनकी तरफ से राजेंद्र सिंह के छोटे भाई अशोक चौधरी की पत्नी सविता देवी अध्यक्ष पद की दावेदार हैं। राजेंद्र सिंह उन्हें ही अभी तक अघोषित प्रत्याशी मानकर रणनीति तैयार करते रहे हैं। दूसरी तरफ बसपा की ओर से मौजूदा अध्यक्ष अंजुम बेगम और उनके देवर मौहम्मद सत्तार बसपा की ओर से प्रमुख दावेदार माने जाते रहे हैं। इस बीच राज्य में सियासी समीकरण बदल जाने और राष्ट्रपति शासन लगने के बाद संभावना यह भी जताई जा रही है कि यह समीकरण भी बदल सकता है क्योंकि कांग्रेस के सत्ता से बाहर होने के बाद पार्टी के कई दिग्गजों के बसपा में जाने और बसपा के कई नेताओं के कांग्रेस की तरफ आने की चर्चाएं लगातार चल रही है। हालांकि अगर चर्चाओं के अनुरूप नेताओं ने पार्टी बदली तो फिर बसपा के चौधरी बिजेंद्र, मुनीर आलम, कांग्रेस के राव आफाक जैसे नेता भी दांव खेल सकते हैं।
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भाजपा फिर बसपा के पीछे दिख रही
राज्य में सरकार बनाने की कवायद में बसपा ने भले ही भाजपा के साथ हाथ नहीं मिलाया हो लेकिन जिला पंचायत की राजनीति में भाजपा एक बार फिर बसपा के साथ खड़ी होती दिख रही है। अध्यक्ष पद की लड़ाई में अपने आपको प्रमुख दावेदार बताती रही भाजपा इस दौड़ से उसी दिन बाहर हो गई थी जब उनके केवल तीन ही सदस्य जीत कर आए थे। अब कांग्रेस को जिला पंचायत की राजनीति से बाहर रखने के लिए भाजपा को बसपा का ही समर्थन करना मजबूरी बन गया है। इससे पहले बने जिला पंचायत के दो बोर्ड में भी बसपा का चेयरमैन भाजपा के ही सहयोग से बनता रहा है।
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बोले नेता
कांग्रेस चुनावों के लिए पहले से ही तैयार है। माहौल कांग्रेस के पक्ष में है। परिणाम पार्टी के अनुरूप ही रहेगा। चेयरमैन कांग्रेस का ही बनेगा।
- चौधरी राजेंद्र सिंह कांग्रेसी नेता
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पंचायत चुनावों में बसपा के पास पूर्ण बहुमत है। जिस तरह से सदस्यों के चुनाव में सभी का सहयोग मिला उसी तरह अध्यक्ष पद पर भी जीत तय है। तीसरी बार भी चेयरमैन बसपा का ही बनेगा।
- सतीश कुमार, प्रदेश अध्यक्ष बसपा
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अभी तक इस बारे में कोई चर्चा नहीं की गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और जिला पंचायत सदस्यों के साथ बैठकर रणनीति बनाई जाएगी।
- सुरेश राठौर जिलाध्यक्ष भाजपा, हरिद्वार
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