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जन्म तो नहीं दिया पर ‘मां यशोदा’ कम नहीं हैं ये
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हर किसी के जीवन में मां की एक खास जगह होती है। इसे और कोई नहीं ले सकता। जिले में ऐसी भी कई मां हैं, जो गरीब व निर्धन बच्चों की मदद कर समाज के लिए मिसाल कायम की। बच्चे ने भले ही उनकी कोख से जन्म नहीं लिया। पर, वे यशोदा बन उन्हीं पर अपना सारा प्यार लुटा रहीं हैं। यह महिलाएं इन बच्चों को पालने-पोसने के साथ ही अफसर बनाने तक के ख्वाब संजोए हैं।
शहर में कई महिलाएं ऐसी हैं जो मां यशोदा की तरह बच्चों का पालन पोषण कर रही हैं। उनका सेवाभाव मां से बढ़कर है। बच्चों की हर जरूरत और उनकी हर परेशानी दूर करना उनका पहला काम है। बच्चे ही उनका परिवार हैं और उनका पालन पोषण ही पहला उद्देश्य है। वे बच्चों को पढ़ाने से लेकर खिलाने और उनको योग्य बनाने का जिम्मा संभाल रही हैं। शहर व देेहात क्षेत्र में बच्चों को पालन पोषण करने वाली ये महिलाएं बिना किसी स्वार्थ के तमाम बच्चों का सहारा बनी हुई हैं। ये बच्चे हैं, जिनका या तो कोई नहीं है या फिर उनके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हैं।
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केस एक
हरिद्वार के पूर्व एसएसपी कृष्ण कुमार वीके की धर्मपत्नी शीबा कृष्ण कुमार आज भी 82 से अधिक अनाथ व भिक्षुकों के बच्चों की परवरिश में जुटी हैं। पति के हरिद्वार में नौकरी करते वक्त शीबा ने बच्चों को चिह्नित किया और उनकी पढ़ाई से लेकर अन्य सभी खर्चा उठाया। इसके साथ ही कई बच्चों केे पढ़ाई के लिए हॉस्टल में भी दाखिल करवाया। वर्तमान में भी एक बच्चे को पढ़ने के लिए केरल भेजा है। वहीं बच्चे के पिता की नौकरी भी लगवाई है। शीबा आज भी हर त्योहार पर कपड़े व उपहार हॉस्टल में पढ़ रहे बच्चों के लेकर उनसे मिलने जाती हैं। कोरोना संक्रमण काल में बच्चों की ऑनलाइन शिक्षा के लिए मोबाइल भी उपलब्ध कराए।
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केस दो
श्रुति लखेड़ा रेवार संस्था चलाती हैं। उनके पति आर्मी में कर्नल हैं। पिछले चार साल से वह हरिद्वार जिले के पिछड़ो इलाकों में रहने वाले बच्चों को शिक्षित करने का काम कर रही हैं। बच्चों के लिए यशोदा बनी श्रुति पिछले चार साल से किराये के मकान में रहकर गरीब व आर्थिक की मदद में जुटी हैं। ताकि यह बच्चें समाज की मुख्य धारा में आ सकें। बच्चों के खाने-पीने से लेकर उनकी हर जरूरत का सामान उपलब्ध कराती हैं। इस समय श्रृति लखेड़ा 24 से अधिक बच्चों की परवरिश कर रही हैं।
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केस तीन
कनखल के जगजीतपुर में रहने वाली पूनम गंभीर पेशे से आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं। वह गरीब बच्चों का इलाज करने के साथ ही बच्चों की पढ़ाई में भी मदद करती हैं। डॉ. पूनम गंभीर आयुर्वेदिक चिकित्सक कनखल के जगजीतपुर में रहती है। यह गरीब बच्चों का इलाज करती हैं। किताबें उपलब्ध कराती है। डॉ. पूनम के पति के एन गंभीर भी चिकित्सक हैं। डॉक्टर पूनम का कहना है कि उनके पति भी इस काम में उनकी मदद करते हैं।
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केस चार
निजी स्कूल की शिक्षिका रीना तोमर बीएचईएल के सेक्टर पांच में रहती हैं। रीना तोमर ने एक ही परिवार की पांच लड़कियों को गोद लिया है। इन बेटियों के पिता का देहांत होने के बाद रीना ने इसकी परवरिश की जिम्मेदारी ली। पांचों बेटियां ज्वालापुर क्षेत्र की रहने वाली हैं। उनकी पढ़ाई से लेकर इलाज तक का खर्चा उठाती हैं। इसके साथ ही बीएचईएल की झुग्गी झोपड़ी में में रहने वाली व ज्वालापुर क्षेत्र में रहने वाली दो लड़कियों की शादी भी करा चुकी हैं। रीना ने 11 लड़कियों की शादी कराने का संकल्प लिया है।
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शहर में कई महिलाएं ऐसी हैं जो मां यशोदा की तरह बच्चों का पालन पोषण कर रही हैं। उनका सेवाभाव मां से बढ़कर है। बच्चों की हर जरूरत और उनकी हर परेशानी दूर करना उनका पहला काम है। बच्चे ही उनका परिवार हैं और उनका पालन पोषण ही पहला उद्देश्य है। वे बच्चों को पढ़ाने से लेकर खिलाने और उनको योग्य बनाने का जिम्मा संभाल रही हैं। शहर व देेहात क्षेत्र में बच्चों को पालन पोषण करने वाली ये महिलाएं बिना किसी स्वार्थ के तमाम बच्चों का सहारा बनी हुई हैं। ये बच्चे हैं, जिनका या तो कोई नहीं है या फिर उनके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हैं।
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केस एक
हरिद्वार के पूर्व एसएसपी कृष्ण कुमार वीके की धर्मपत्नी शीबा कृष्ण कुमार आज भी 82 से अधिक अनाथ व भिक्षुकों के बच्चों की परवरिश में जुटी हैं। पति के हरिद्वार में नौकरी करते वक्त शीबा ने बच्चों को चिह्नित किया और उनकी पढ़ाई से लेकर अन्य सभी खर्चा उठाया। इसके साथ ही कई बच्चों केे पढ़ाई के लिए हॉस्टल में भी दाखिल करवाया। वर्तमान में भी एक बच्चे को पढ़ने के लिए केरल भेजा है। वहीं बच्चे के पिता की नौकरी भी लगवाई है। शीबा आज भी हर त्योहार पर कपड़े व उपहार हॉस्टल में पढ़ रहे बच्चों के लेकर उनसे मिलने जाती हैं। कोरोना संक्रमण काल में बच्चों की ऑनलाइन शिक्षा के लिए मोबाइल भी उपलब्ध कराए।
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केस दो
श्रुति लखेड़ा रेवार संस्था चलाती हैं। उनके पति आर्मी में कर्नल हैं। पिछले चार साल से वह हरिद्वार जिले के पिछड़ो इलाकों में रहने वाले बच्चों को शिक्षित करने का काम कर रही हैं। बच्चों के लिए यशोदा बनी श्रुति पिछले चार साल से किराये के मकान में रहकर गरीब व आर्थिक की मदद में जुटी हैं। ताकि यह बच्चें समाज की मुख्य धारा में आ सकें। बच्चों के खाने-पीने से लेकर उनकी हर जरूरत का सामान उपलब्ध कराती हैं। इस समय श्रृति लखेड़ा 24 से अधिक बच्चों की परवरिश कर रही हैं।
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केस तीन
कनखल के जगजीतपुर में रहने वाली पूनम गंभीर पेशे से आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं। वह गरीब बच्चों का इलाज करने के साथ ही बच्चों की पढ़ाई में भी मदद करती हैं। डॉ. पूनम गंभीर आयुर्वेदिक चिकित्सक कनखल के जगजीतपुर में रहती है। यह गरीब बच्चों का इलाज करती हैं। किताबें उपलब्ध कराती है। डॉ. पूनम के पति के एन गंभीर भी चिकित्सक हैं। डॉक्टर पूनम का कहना है कि उनके पति भी इस काम में उनकी मदद करते हैं।
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केस चार
निजी स्कूल की शिक्षिका रीना तोमर बीएचईएल के सेक्टर पांच में रहती हैं। रीना तोमर ने एक ही परिवार की पांच लड़कियों को गोद लिया है। इन बेटियों के पिता का देहांत होने के बाद रीना ने इसकी परवरिश की जिम्मेदारी ली। पांचों बेटियां ज्वालापुर क्षेत्र की रहने वाली हैं। उनकी पढ़ाई से लेकर इलाज तक का खर्चा उठाती हैं। इसके साथ ही बीएचईएल की झुग्गी झोपड़ी में में रहने वाली व ज्वालापुर क्षेत्र में रहने वाली दो लड़कियों की शादी भी करा चुकी हैं। रीना ने 11 लड़कियों की शादी कराने का संकल्प लिया है।