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धनौरी : 20 गांवों को बसों का इंतजार
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- परिवहन व्यवस्था महज ई-रिक्शा पर आधारित, मंत्री बोले, जल्द होगी शुरुआत
- ग्रामीणों का बसों का इंतजार बरकरार
संवाद न्यूज एजेंसी
धनौरी। तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहे कस्बा धनौरी और आसपास के करीब 20 गांवों में सार्वजनिक परिवहन की कमी है। यहां की परिवहन व्यवस्था मुख्य रूप से ई-रिक्शा और निजी वाहनों पर निर्भर है। क्षेत्र में कई बार बसों का संचालन शुरू करने की घोषणाएं हुई हैं, लेकिन ग्रामीणों का इंतजार अभी भी बरकरार है।
पिछले एक दशक में धनौरी कस्बे का तेजी से विकास हुआ है। यहां स्थापित कॉलेजों और सरकारी कार्यालयों के कारण लोगों की आवाजाही में वृद्धि हुई है। कस्बे के विस्तार और आसपास के गांवों की बढ़ती जरूरतों ने सार्वजनिक परिवहन की मांग को तेज किया है। आजादी के बाद से ही क्षेत्र में नियमित बस सेवा की मांग अधूरी बनी हुई है।
पूर्व में भगवानपुर क्षेत्र के तत्कालीन विधायक सुरेंद्र राकेश के परिवहन मंत्री बनने पर कुछ समय के लिए बसों का संचालन शुरू हुआ था। उनके निधन के बाद यह व्यवस्था बंद हो गई थी। तब से क्षेत्र के लोग दोबारा बस सेवा शुरू होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। वर्तमान में धनौरी पहुंचने के बाद 15 से 20 गांवों में जाने के लिए यात्रियों को ई-रिक्शा या निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है।
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मौजूदा परिवहन मंत्री और रुड़की विधायक प्रदीप बत्रा ने शपथ लेने के बाद हरिओम सरस्वती पीजी कॉलेज में आयोजित एक समारोह में घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि सार्वजनिक परिवहन से वंचित क्षेत्रों में बसों का संचालन उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। इस घोषणा के बाद समूचे घाड़ क्षेत्र में निरीक्षण भी कराया जा चुका है। हालांकि, अब तक बस सेवा शुरू नहीं हो सकी है।
परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा का कहना है कि परिवहन निगम स्तर पर बैठक हो चुकी है। बस संचालन को लेकर पूरी व्यवस्था तैयार कर दी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही इस क्षेत्र में बसों का संचालन शुरू कराया जाएगा।
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- ग्रामीणों का बसों का इंतजार बरकरार
संवाद न्यूज एजेंसी
धनौरी। तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहे कस्बा धनौरी और आसपास के करीब 20 गांवों में सार्वजनिक परिवहन की कमी है। यहां की परिवहन व्यवस्था मुख्य रूप से ई-रिक्शा और निजी वाहनों पर निर्भर है। क्षेत्र में कई बार बसों का संचालन शुरू करने की घोषणाएं हुई हैं, लेकिन ग्रामीणों का इंतजार अभी भी बरकरार है।
पिछले एक दशक में धनौरी कस्बे का तेजी से विकास हुआ है। यहां स्थापित कॉलेजों और सरकारी कार्यालयों के कारण लोगों की आवाजाही में वृद्धि हुई है। कस्बे के विस्तार और आसपास के गांवों की बढ़ती जरूरतों ने सार्वजनिक परिवहन की मांग को तेज किया है। आजादी के बाद से ही क्षेत्र में नियमित बस सेवा की मांग अधूरी बनी हुई है।
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पूर्व में भगवानपुर क्षेत्र के तत्कालीन विधायक सुरेंद्र राकेश के परिवहन मंत्री बनने पर कुछ समय के लिए बसों का संचालन शुरू हुआ था। उनके निधन के बाद यह व्यवस्था बंद हो गई थी। तब से क्षेत्र के लोग दोबारा बस सेवा शुरू होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। वर्तमान में धनौरी पहुंचने के बाद 15 से 20 गांवों में जाने के लिए यात्रियों को ई-रिक्शा या निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है।
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मौजूदा परिवहन मंत्री और रुड़की विधायक प्रदीप बत्रा ने शपथ लेने के बाद हरिओम सरस्वती पीजी कॉलेज में आयोजित एक समारोह में घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि सार्वजनिक परिवहन से वंचित क्षेत्रों में बसों का संचालन उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। इस घोषणा के बाद समूचे घाड़ क्षेत्र में निरीक्षण भी कराया जा चुका है। हालांकि, अब तक बस सेवा शुरू नहीं हो सकी है।
परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा का कहना है कि परिवहन निगम स्तर पर बैठक हो चुकी है। बस संचालन को लेकर पूरी व्यवस्था तैयार कर दी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही इस क्षेत्र में बसों का संचालन शुरू कराया जाएगा।