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फाइल में बिल्डिंग, मौके पर छप्पर
hridwar uttrakhanda india
Updated Tue, 29 Mar 2016 12:09 AM IST
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हरिद्वार। शिक्षा विभाग में अंधेरगर्दी का आलम पसरा है। खेत में बने छप्परों को फाइल में छह कमरों के भवन वाला स्कूल दिखाया गया है। बाबू और बीईओ स्तर से फाइल पास हो गई। जब जिला शिक्षा अधिकारी ने स्थलीय निरीक्षण किया तो आंखें खुली की खुली रह गई। उन्होंने स्कूल की मान्यता पर रोक लगा दी।
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प्राइवेट प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल की मान्यता के लिए शिक्षा विभाग को पिछले साल 67 आवेदन मिले थे। जिनमें से 55 प्राथमिक और 12 जूनियर की मान्यता के लिए थे। आवेदन के साथ भवन का नक्शा, भवनों की माप, कुल क्षेत्र, कक्षा कक्ष, प्रधानाध्यापक कक्षा और शौचालय आदि के कागज भी लगाने पड़ते हैं। खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय स्तर पर सभी मानकों और औपचारिकताओं को स्थलीय निरीक्षण करने के बाद फाइल जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक के पास भेजी जाती है। वह भी फाइल की जांच करते हैं। इसके बाद मान्यता के लिए विभागीय अधिकारियों की बैठक बुलाई जाती है। बैठक में जिन स्कूलों के लिए सहमति बनती है उनको मान्यता दे दी जाती है। मान्यता के सर्टिफिकेट के साथ कक्षा संचालन की अनुमति भी दे दी जाती है। जिनमें कुछ कमी होती है उसे कुछ समय में पूरा करने के लिए नोटिस जारी किया जाता है। जिला शिक्षा अधिकारी रामेंद्र कुशवाहा ने बताया कि जितनी भी फाइल जिले के समस्त खंड शिक्षा अधिकारियों की ओर से पास कर भेजी गई उन्हें उन पर शक हुआ। जब उन्होंने स्थलीय निरीक्षण किया तो वह भौचक्के रह गए।
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बहादराबाद ब्लाक स्थित उस स्कूल के नाम पर एक खेत में दो छप्पर थे। इसके अलावा वहां कुछ भी नहीं था। जबकि फाइल में छह कमरों का भवन और अन्य सुविधाएं दिखाई गई थी। उन्होंने बताया कि इस फाइल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
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केवल 18 को हरी झंड़ी
जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक का कहना है कि मान्यता के लिए आई किसी भी फाइल को बिना स्थलीय निरीक्षण के ओके नहीं किया जाएगा। अभी तक उन्होंने केवल 22 स्कूूूलों का निरीक्षण किया है और सभी मानक पूरे करने वाले केवल 18 स्कूलों को हरी झंडी दी गई। बाकी चार में जो कमियां हैं उनको पूरा करने के लिए नोटिस जारी कर दिए गए।
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अधिकारी को पता नहीं बाबू ने तय की बैठक
मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय में प्राइमरी और जूनियर की मान्यता वाले पटल के बाबू ने अपनी मर्जी से मान्यता की बैठक तय कर दी। जबकि अधिकारी को बैठक की जानकारी तक नहीं। डीईओ बेसिक ने बताया कि एक फरवरी को उन्होंने बीमारी के बाद कार्यालय ज्वाइन किया और दो फरवरी को सुनने में आया था कि मान्यता की बैठक बुलाई गई। उन्होंने बताया कि इसलिए बैठक नहीं की गई क्योंकि उन्होंने बैठक के लिए नहीं कहा था। अब बाबू जाने वह किसे मान्यता दे रहा है।