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जिलाधिकारी ने किया बालगृहों का निरीक्षण
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार। जिलाधिकारी दीपक रावत ने शनिवार को बालगृहों के निरीक्षण में जगजीतपुर स्थित मातृ आंचल स्कूल में एक किशोरी का हाथ जला हुआ पाया। जांच में पाया गया कि जिला चिकित्सालय में जो चिकित्सक बच्ची का उपचार कर रहे थे उन्होंने सारी दवाएं बाहर से खरीदने को लिखा हुआ था। इसपर डीएम ने नाराजगी जताते हुए चिकित्सक के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। इस दौरान उन्होंने अन्य बालगृहों का भी निरीक्षण किया।
शनिवार को जिलाधिकारी ने बालगृहों के निरीक्षण के दौरान वहां रह रहे बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा, अनुकूल वातावरण, सुुरक्षा और स्वच्छता के मानकों की निगरानी करते हुए जिला स्तर पर गठित बाल संरक्षण समिति को सभी संस्थाओं के पंजिकरण दस्तावेज आश्रमों पर चस्पा कराने के निर्देश दिये। दोपहर बाद चेकिंग अभियान पर निकले जिलाधिकारी जगजीतपुर स्थित मातृ आंचल बालगृह पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कक्षा नौ की एक बालिका का हाथ बुरी तरह जला हुआ पाया। प्रबंधन ने पूछताछ में बताया कि खाना पकाते समय छात्रा अचानक चक्कर आने पर चूल्हे पर गिर गई थी। छात्रा का जिला चिकित्सालय ले जाकर उपचार कराया गया। उपचार के बाद उसे दूसरे स्तर का जला होना पाते हुए छात्रा हो हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया गया। प्रबंधक ने बताया कि सरकारी चिकित्सालय में सारी दवाएं बाहर से लिखी गई। डीएम दीपक रावत ने बताया कि छात्रा के हाथ जलने और चिकित्सक के बाहर से दवाएं लिखने की जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही जांच कर चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए। डीएम ने अपनी उपस्थिति में छात्रा को 108 के माध्यम से एम्स भेजा। मातृ आंचल की प्रबंधक ममता अग्रवाल ने जिलाधिकारी को संस्था की गतिविधियों के बारे में बताया।
डीएम ने रावली महदूद में गृह रामराज संस्थान द्वारा संचालित खुला आश्रय संस्था का निरीक्षण किया। इसके बाद जिलाधिकारी ने वात्सल्य वाटिका और शिशु पालन ट्रस्ट का भी निरीक्षण किया। इस मौके पर जिला प्रोबेशन अधिकारी रणजीत सिंह बड़थ्वाल, टीबी हॉस्पिटल के चिकित्साधिकारी डॉ अजय कुमार, बाल संरक्षण अधिकारी बेबी नाज, शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
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शनिवार को जिलाधिकारी ने बालगृहों के निरीक्षण के दौरान वहां रह रहे बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा, अनुकूल वातावरण, सुुरक्षा और स्वच्छता के मानकों की निगरानी करते हुए जिला स्तर पर गठित बाल संरक्षण समिति को सभी संस्थाओं के पंजिकरण दस्तावेज आश्रमों पर चस्पा कराने के निर्देश दिये। दोपहर बाद चेकिंग अभियान पर निकले जिलाधिकारी जगजीतपुर स्थित मातृ आंचल बालगृह पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कक्षा नौ की एक बालिका का हाथ बुरी तरह जला हुआ पाया। प्रबंधन ने पूछताछ में बताया कि खाना पकाते समय छात्रा अचानक चक्कर आने पर चूल्हे पर गिर गई थी। छात्रा का जिला चिकित्सालय ले जाकर उपचार कराया गया। उपचार के बाद उसे दूसरे स्तर का जला होना पाते हुए छात्रा हो हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया गया। प्रबंधक ने बताया कि सरकारी चिकित्सालय में सारी दवाएं बाहर से लिखी गई। डीएम दीपक रावत ने बताया कि छात्रा के हाथ जलने और चिकित्सक के बाहर से दवाएं लिखने की जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही जांच कर चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए। डीएम ने अपनी उपस्थिति में छात्रा को 108 के माध्यम से एम्स भेजा। मातृ आंचल की प्रबंधक ममता अग्रवाल ने जिलाधिकारी को संस्था की गतिविधियों के बारे में बताया।
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डीएम ने रावली महदूद में गृह रामराज संस्थान द्वारा संचालित खुला आश्रय संस्था का निरीक्षण किया। इसके बाद जिलाधिकारी ने वात्सल्य वाटिका और शिशु पालन ट्रस्ट का भी निरीक्षण किया। इस मौके पर जिला प्रोबेशन अधिकारी रणजीत सिंह बड़थ्वाल, टीबी हॉस्पिटल के चिकित्साधिकारी डॉ अजय कुमार, बाल संरक्षण अधिकारी बेबी नाज, शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
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