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.....लो साहब सतीकुंड का भी रिकार्ड नहीं है
Updated Thu, 05 Jul 2018 11:48 PM IST
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हरिद्वार। नगर निगम का सारा कामकाज हवा में चल रहा है। नगर पालिका परिषद से उच्चीकृत होने के आठ साल बाद भी निगम के पास अपनी संपत्तियों का रिकार्ड तक नहीं है। पौराणिक सतीकुंड कनखल में अतिक्रमण हटाने से पहले निरीक्षण को गई निगम की टीम बगले झांकती रही। हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई करने का निगम पर दबाव है, लेकिन बिना राजस्व रिकार्ड पहुंची टीम को मौके से खाली हाथ ही लौटना पड़ा।
हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सतीकुंड का अतिक्रमण हटाने और सौंदर्यीकरण का आदेश दिया है। जिसके अनुपालन में नगर आयुक्त नितिन सिंह भदौरिया के निर्देश पर कर एवं राजस्व अधीक्षक सुनीता सक्सेना के नेतृत्व में नगर निगम की टीम सतीकुंड की स्थिति का जायजा लेने मौके पर गई। टीम में अवर अभियंता शशी खंडूड़ी, लिपिक वेदपाल और मानचित्रकार दिनेश कांडपाल शामिल थे। लेकिन सतीकुंड से संबंधित कोई भी अभिलेखीय रिकार्ड नहीं होने के कारण टीम को बैरंग लौटना पड़ा। हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में नगर निगम को सतीकुंड से कच्चा-पक्का अतिक्रमण हटाना है और हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण को उसका सौंदर्यीकरण कराना है।
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नितिन सिंह भदौरिया प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के साथ-साथ नगर आयुक्त भी हैं इसलिए दोनों ही काम उन्हें ही कराने हैं। कर एवं राजस्व अधीक्षक सुनीता सक्सेना ने बताया कि टीम मौके पर स्थिति देखने गई थी। निर्माण विभाग के पास सतीकुंड संबंधी कोई रिकार्ड नहीं था। इसलिए अब राजस्व विभाग से रिकार्ड लेकर वस्तु स्थिति की रिपोर्ट तैयार कर नगर आयुक्त को दी जाएगी। इससे पहले नगर निगम की पीठ बाजार ज्वालापुर की भूमि पर कब्जा कर अवैध निर्माण किया गया। नगर निगम रिकार्ड तलाशता रहा, इसी प्रकार भूपतवाला में प्राइमरी पाठशाला 44 की भूमि सड़क बना दी गई, जमीन पर कब्जा किया गया। नगर निगम अभिलेख ढूंढता रहा। पांडेवाला ज्वालापुर में करोड़ों की रुपये की जमीन कब्जा ली गई तो उसको चिन्हित करने के लिए राजस्व विभाग की मदद लेनी पड़ रही है।
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