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अब आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों की तलाश विदेशों में भी
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
स्वामी रामदेव की पतंजलि योगपीठ ने कुछ जड़ी बूटियों की तलाश विदेशों में भी शुरू की है। पतंजलि योगपीठ की ओर से तैयार किए गए योग पाठ्यक्रम को दुनिया के कई विश्वविद्यालयों में मंगाया गया है।
पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि जड़ी बूटियां भारत में ही नहीं पूरे विश्व में पाई जाती हैं। दुनिया को अब पता चला रहा है कि जड़ी बूटियों का कितना महत्व है। विदेशों में जड़ी बूटियों की खोज का काम उतने बड़े पैमाने पर कभी नहीं हुआ, जितनी आवश्यकता थी। पतंजलि योगपीठ के कार्यों से प्रभावित होकर दुनिया के कई देशों ने अपने यहां की जड़ी बूटियां खोजने के काम में सहयोग मांगा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने विश्व की दुर्लभ जड़ी बूटियों पर विश्व कोष तैयार किया है। इस कोष में पांच हजार से अधिक जड़ी बूटियों का विस्तार से वर्णन किया गया है। इन जड़ी बूटियों में से कुछ विदेशों में भी प्राप्त होती है। वानस्पतिक वांगमय पर लगातार काम जारी है। कुछ समय बाद पांच लाख से अधिक जड़ी बूटियों और औषधियों के बारे में विस्तार से जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इस कार्य में पतंजलि का अनुसंधान विभाग जुटा हुआ है। विश्व में योग के साथ आयुर्वेद के प्रति भी जागरूकता पैदा हो रही है। यही कारण है कि ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देश भी अपने यहां उपलब्ध वानस्पतिक के बारे में जानना चाहते है। इस कार्य में पतंजलि योगपीठ पूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है।
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स्वामी रामदेव की पतंजलि योगपीठ ने कुछ जड़ी बूटियों की तलाश विदेशों में भी शुरू की है। पतंजलि योगपीठ की ओर से तैयार किए गए योग पाठ्यक्रम को दुनिया के कई विश्वविद्यालयों में मंगाया गया है।
पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि जड़ी बूटियां भारत में ही नहीं पूरे विश्व में पाई जाती हैं। दुनिया को अब पता चला रहा है कि जड़ी बूटियों का कितना महत्व है। विदेशों में जड़ी बूटियों की खोज का काम उतने बड़े पैमाने पर कभी नहीं हुआ, जितनी आवश्यकता थी। पतंजलि योगपीठ के कार्यों से प्रभावित होकर दुनिया के कई देशों ने अपने यहां की जड़ी बूटियां खोजने के काम में सहयोग मांगा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने विश्व की दुर्लभ जड़ी बूटियों पर विश्व कोष तैयार किया है। इस कोष में पांच हजार से अधिक जड़ी बूटियों का विस्तार से वर्णन किया गया है। इन जड़ी बूटियों में से कुछ विदेशों में भी प्राप्त होती है। वानस्पतिक वांगमय पर लगातार काम जारी है। कुछ समय बाद पांच लाख से अधिक जड़ी बूटियों और औषधियों के बारे में विस्तार से जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इस कार्य में पतंजलि का अनुसंधान विभाग जुटा हुआ है। विश्व में योग के साथ आयुर्वेद के प्रति भी जागरूकता पैदा हो रही है। यही कारण है कि ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देश भी अपने यहां उपलब्ध वानस्पतिक के बारे में जानना चाहते है। इस कार्य में पतंजलि योगपीठ पूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है।
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