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संस्कृति के अनुरूप शिक्षा नहीं तो विकास किसी काम का नहीं : शाह
Updated Fri, 28 Sep 2018 12:12 AM IST
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हरिद्वार। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद अमित शाह ने पुरातन भारतीय संस्कृति और आधुनिक शिक्षा का समन्वय पर जोर दिया। उन्होेंने कहा कि आचार्यकुलम मैकाले की दोषपूर्ण शिक्षा पद्धति का श्रेष्ठ विकल्प है। यहाँ से तेजस्वी, ओजस्वी व वैदिक संस्कार से सिंचित नागरिक तैयार होंगे जो भारत ही नहीं पूरे विश्व में फैले विकारों का शमन करते हुए भारतीय संस्कृति की पताका फहराएंगे।
उन्होेंने कहा कि कितनी भी कठिनाइयां आएं स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण अपने लक्ष्य को लेकर दृढ़ हैं। स्वदेशी शिक्षा का कार्य पतंजलि के सभी कार्यों में सबसे कठिन कार्य है लेकिन हम आश्वस्त हैं कि यह कार्य भी वे सहजता से करके दिखाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि हमारी शिक्षा प्रणाली हमारी संस्कृति के अनुरूप नहीं है तो विकास किसी काम का नहीं है। उन्होंने कहा कि 10 हजार विद्यार्थियों के लिए आचार्यकुलम और एक लाख विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय की स्वामी रामदेव की संकल्पना कोई छोटा कार्य नहीं है।
स्वामी रामदेव ने कहा कि वर्ष 2013 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस आचार्यकुलम संस्थान की शुरूआत की थी वह संस्थान देश के पांच प्रामाणिक सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों में शामिल हो चुका है। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि शिक्षा में स्वदेशी को लेकर आज पूरे देश में नया उत्साह देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि आचार्यकुलम स्वदेशी शिक्षा का बेहतर विकल्प है। यहां विद्यार्थियों को भाषा के स्तर पर हिंदी, संस्कृत व अंग्रेेजी भाषाओं में पारंगत किया जा रहा है। समारोह में स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज, विधायक आदेश चौहान, संजय गुप्ता, स्वामी यतीश्वरानंद, सुरेश राठौर, भाजपा के जिला प्रभारी विनय रोहेला, महामंत्री महामंत्री विकास तिवारी, नरेश शर्मा, महावीर अग्रवाल, ललित मोहन जोशी आदि मौजूद थे।
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आचार्यकुलम के बच्चों ने मन मोहा
लोकार्पण समारोह में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के स्वागत में आचार्यकुलम की छात्राओं ने संस्कृत में स्वागत गान प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमुदाय की खूब वाहवाही लूटी। अंग्रेजी और हिंदी में भाषण ने छात्रों ने जहां अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। वहीं संगतीमय योग की प्रस्तुति देकर पंडाल में मौजूद हर व्यक्ति को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।
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उन्होेंने कहा कि कितनी भी कठिनाइयां आएं स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण अपने लक्ष्य को लेकर दृढ़ हैं। स्वदेशी शिक्षा का कार्य पतंजलि के सभी कार्यों में सबसे कठिन कार्य है लेकिन हम आश्वस्त हैं कि यह कार्य भी वे सहजता से करके दिखाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि हमारी शिक्षा प्रणाली हमारी संस्कृति के अनुरूप नहीं है तो विकास किसी काम का नहीं है। उन्होंने कहा कि 10 हजार विद्यार्थियों के लिए आचार्यकुलम और एक लाख विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय की स्वामी रामदेव की संकल्पना कोई छोटा कार्य नहीं है।
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स्वामी रामदेव ने कहा कि वर्ष 2013 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस आचार्यकुलम संस्थान की शुरूआत की थी वह संस्थान देश के पांच प्रामाणिक सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों में शामिल हो चुका है। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि शिक्षा में स्वदेशी को लेकर आज पूरे देश में नया उत्साह देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि आचार्यकुलम स्वदेशी शिक्षा का बेहतर विकल्प है। यहां विद्यार्थियों को भाषा के स्तर पर हिंदी, संस्कृत व अंग्रेेजी भाषाओं में पारंगत किया जा रहा है। समारोह में स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज, विधायक आदेश चौहान, संजय गुप्ता, स्वामी यतीश्वरानंद, सुरेश राठौर, भाजपा के जिला प्रभारी विनय रोहेला, महामंत्री महामंत्री विकास तिवारी, नरेश शर्मा, महावीर अग्रवाल, ललित मोहन जोशी आदि मौजूद थे।
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आचार्यकुलम के बच्चों ने मन मोहा
लोकार्पण समारोह में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के स्वागत में आचार्यकुलम की छात्राओं ने संस्कृत में स्वागत गान प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमुदाय की खूब वाहवाही लूटी। अंग्रेजी और हिंदी में भाषण ने छात्रों ने जहां अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। वहीं संगतीमय योग की प्रस्तुति देकर पंडाल में मौजूद हर व्यक्ति को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।