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मतदान तो करेंगे पर, चुनाव न लड़ सकेंगे वयस्क पुरोहित
Updated Thu, 05 Jul 2018 11:44 PM IST
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हरिद्वार। भले ही गंगा सभा के वर्तमान पदाधिकारियों की ओर से सभी वयस्क पुरोहितों को मताधिकार दिया जा रहा हो, लेकिन वे सभा का चुनाव सीधे-सीधे नहीं लड़ पाएंगे। चुनाव लड़ने के लिए उन्हें पहले प्रधान सभा की सदस्यता अपने थोक से हासिल करनी होगी।
मतदान का अधिकार महती सभा को दिए जाने को लेकर युुवा पुरोहितों में भारी उत्साह है। कई युवा इसके लिए हस्ताक्षर अभियान चलाकर शक्ति बटोर रहे हैं। वास्तव में युवा पुरोहितों की मंशा है कि दशकों से चली आ रही बुजुर्ग राजनीति को गंगा सभा से अलविदा कहकर परिवर्तन की बयार चलाई जाए। इसके लिए मताधिकार न होना बाधक था। अब 11 जुलाई की बैठक में मताधिकार मिलना लगभग तय है। युवाओं को यह जानकार धक्का लगा कि महती सभा के सदस्य खुद चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इसके लिए उन्हें पहले प्रधान सभा का सदस्य बनना पड़ेगा और प्रधान सभा के प्रस्तावकों और अनुमोदकों को भी जुटाना पड़ेगा। इसका पता लगने पर युुवा पुरोहित काफी निराश हैं। युवा चाहते हैं कि वर्तमान में कार्यरत और पूर्व के कोई भी पदाधिकारी अगला चुनाव न लड़ पाएं। यहां वर्तमान महामंत्री रामकुुमार मिश्रा भले ही वयस्क मताधिकार के सबसे बड़े पैरोकार बने हुए हों, लेकिन युवाओं की धारणा सबसे पहले महामंत्री पद ही कब्जाने की है। परिणाम स्वरूप भावी महामंत्री के लिए अनेक युवा दावेदार सामने आ रहे हैं। युवा पुरोहितों के बीच बाकायदा हस्ताक्षर अभियान चलाकर ये युवा नई रूपरेखा तैयार करने में जुट गए हैं।
उधर, वर्तमान सत्तारूढ़ खेमे का विरोध कर रहे गंगा सभा अध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा गांधीवादी बुरी तरह फंस गए हैं। अभी तक वे अपने गुट के कर्णधार और संचालक पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी और पूर्व महामंत्री विरेंद्र श्रीकुंज के कहे से सत्तारूढ़ महामंत्री का विरोध कर रहे थे। यद्यपि उन्हें यह खौफ सता रहा है कि कहीं युवा वर्ग ही उनके खिलाफ न हो जाए। परिणाम स्वरूप उन्होंने महामंत्री रामकुमार मिश्रा से भी सतत संपर्क बना रखा है। यहां तक की वे सहायक निबंधक से मिलने अपने गुट के पदाधिकारियों के साथ ही नहीं गए थे। अलबत्ता महामंत्री रामकुमार मिश्रा द्वारा छोड़े वयस्क मताधिकार के शगूफे के कारण हरकी पैड़ी की प्रबंधकारिणी संस्था गंगा सभा के चुनाव बेहद रोचक मोड़ पर पहुंच गए हैं।
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मतदान का अधिकार महती सभा को दिए जाने को लेकर युुवा पुरोहितों में भारी उत्साह है। कई युवा इसके लिए हस्ताक्षर अभियान चलाकर शक्ति बटोर रहे हैं। वास्तव में युवा पुरोहितों की मंशा है कि दशकों से चली आ रही बुजुर्ग राजनीति को गंगा सभा से अलविदा कहकर परिवर्तन की बयार चलाई जाए। इसके लिए मताधिकार न होना बाधक था। अब 11 जुलाई की बैठक में मताधिकार मिलना लगभग तय है। युवाओं को यह जानकार धक्का लगा कि महती सभा के सदस्य खुद चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इसके लिए उन्हें पहले प्रधान सभा का सदस्य बनना पड़ेगा और प्रधान सभा के प्रस्तावकों और अनुमोदकों को भी जुटाना पड़ेगा। इसका पता लगने पर युुवा पुरोहित काफी निराश हैं। युवा चाहते हैं कि वर्तमान में कार्यरत और पूर्व के कोई भी पदाधिकारी अगला चुनाव न लड़ पाएं। यहां वर्तमान महामंत्री रामकुुमार मिश्रा भले ही वयस्क मताधिकार के सबसे बड़े पैरोकार बने हुए हों, लेकिन युवाओं की धारणा सबसे पहले महामंत्री पद ही कब्जाने की है। परिणाम स्वरूप भावी महामंत्री के लिए अनेक युवा दावेदार सामने आ रहे हैं। युवा पुरोहितों के बीच बाकायदा हस्ताक्षर अभियान चलाकर ये युवा नई रूपरेखा तैयार करने में जुट गए हैं।
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उधर, वर्तमान सत्तारूढ़ खेमे का विरोध कर रहे गंगा सभा अध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा गांधीवादी बुरी तरह फंस गए हैं। अभी तक वे अपने गुट के कर्णधार और संचालक पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी और पूर्व महामंत्री विरेंद्र श्रीकुंज के कहे से सत्तारूढ़ महामंत्री का विरोध कर रहे थे। यद्यपि उन्हें यह खौफ सता रहा है कि कहीं युवा वर्ग ही उनके खिलाफ न हो जाए। परिणाम स्वरूप उन्होंने महामंत्री रामकुमार मिश्रा से भी सतत संपर्क बना रखा है। यहां तक की वे सहायक निबंधक से मिलने अपने गुट के पदाधिकारियों के साथ ही नहीं गए थे। अलबत्ता महामंत्री रामकुमार मिश्रा द्वारा छोड़े वयस्क मताधिकार के शगूफे के कारण हरकी पैड़ी की प्रबंधकारिणी संस्था गंगा सभा के चुनाव बेहद रोचक मोड़ पर पहुंच गए हैं।
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