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चंपावत के इंजीनियरिंग छात्र ने किया कमाल: तैयार किया सोलर वाहन, पहाड़ों की चढ़ाई में भी कारगर

Wed, 14 Oct 2026 11:15 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, चंपावत
अमर उजाला नेटवर्क, चंपावत Published by: Heera Updated Wed, 14 Oct 2026 11:15 PM IST
सार

चंपावत के राहुल ने एक माह की कड़ी मेहनत से सोलर वाहन तैयार किया है, जिसे पहाड़ों की चढ़ाई पर चलाना आसान है। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्र राहुल का दावा है कि इस वाहन से एक बैटरी में करीब 70 किमी और दो बैटरी से 140 किमी तक का सफर किया जा सकता है।

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Young engineer Rahul from Champawat made a solar vehicle
राहुल नरियाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 

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चंपावत जिले के मादली निवासी और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्र 20 वर्षीय राहुल नरियाल ने मात्र एक महीने की कड़ी मेहनत और करीब 40,000 रुपये की लागत से एक अनूठा सोलर वाहन तैयार किया है। सौर ऊर्जा से चलने वाला यह वाहन पहाड़ी क्षेत्रों की चढ़ाई पर भी आसानी से संचालित हो सकता है।

राहुल ने बताया कि सोलर वाहन पर्यावरण संरक्षण के लिए भी एक अच्छा विकल्प है। चलते-चलते यह चार्ज हो जाएगा। दूसरा मौसम खराब होने पर इसे बिजली से भी चार्ज किया जा सकता है। दोनों ही विकल्प इसमें मौजूद हैं। उन्होंने व्यक्तिगत खर्च की बचत कर वाहन के लिए आवश्यक सामान खरीदा।

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वाहन में सोलर प्लेट, बैटरी समेत कार में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न उपकरण लगाए गए हैं। राहुल का दावा है कि उनके तैयार किए गए वाहन की अधिकतम गति करीब 65 से 70 किमी प्रति घंटा है। वाहन में दो बैटरियां लगाई गई हैं।

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उनके मुताबिक एक बैटरी से करीब 70 किमी तक सफर किया जा सकता है, जबकि दोनों बैटरियों के इस्तेमाल से कुल दूरी करीब 140 किमी तक पहुंच सकती है। मौसम साफ होने पर यह दूरी अधिक भी हो सकती है। राहुल अब तक वाहन को करीब 90 किमी चला चुके हैं और कॉलेज आने-जाने में भी इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि तीन लोगों को बैठाकर चढ़ाई वाली जगह पर इसका सफल प्रयोग हुआ है। 215 किलो भार के साथ वाहन को चढ़ाई पर संचालित किया गया। हालांकि गड्ढों से भरी या खराब सड़क पर इसे चलाना संभव नहीं है।

मैकेनिकल काम में आई दिक्कत
चंडीगढ़ में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे राहुल ने बताया कि इलेक्ट्रिकल क्षेत्र की जानकारी से उन्हें वाहन के ऊर्जा और बैटरी सिस्टम को समझने में मदद मिली। हालांकि, वाहन के मैकेनिकल हिस्से पर काम करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा। मैकेनिकल कार्यों से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों के दौरान उनके एक सीनियर ने आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन दिया, जिससे वह प्रोजेक्ट पूरा कर सके। राहुल ने बताया कि पेट्रोल की सीमित उपलब्धता और बढ़ती जरूरतों को देखते हुए भविष्य में यह वाहन बेहतर विकल्प बन सकता है। इससे ईंधन की बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।

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