फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   You can not turn the trauma center in Champawat

मरीजों का दर्द कब दूर करेगा ट्रॉमा सेंटर

Thu, 01 Sep 2016 11:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत Updated Thu, 01 Sep 2016 11:02 PM IST
विज्ञापन
You can not turn the trauma center in Champawat
चंपावत में चालू नहीं हो सके ट्रॉमा सेंटर - फोटो : अमर उजाला

चंपावत। लोहाघाट की तरह जिले के प्रवेशद्वार टनकपुर का ट्रॉमा सेंटर भी मरीजों का इलाज करने के बजाय सिरदर्द बना हुआ है। करीब एक करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस ट्रॉमा सेंटर भवन का संचालन पहेली बना है। यहां न पदों का सृजन हुआ और नहीं उपकरण मिल सके हैं।

विज्ञापन


टनकपुर का ट्रॉमा सेंटर भवन पिछले साल बनकर तैयार हुआ। देर से भवन निर्माण के बाद इसमें इलाज की सुविधा की दूर-दूर तक कोई संभावना नहीं है। भवन हस्तांतरित होने के बाद इनका इस्तेमाल कैसे और कब तक होगा, इसका जवाब न विभाग के पास है और नहीं जनप्रतिनिधियों के पास। ट्रॉमा सेंटर में सर्जन, निश्चेतक, न्यूरो सर्जन सहित डॉक्टरों के छह पद और इतने ही पैरा मेडिकल स्टाफ के पद होने चाहिए पर अभी एक भी पद यहां सृजित नहीं हुआ है। उपकरण भी अब तक नहीं मिले।
विज्ञापन


लोहाघाट (चंपावत)। पीपीपी अस्पताल को निरस्त कर सीएचसी में तब्दील करने के अलावा ट्रॉमा सेंटर (आधुनिक सुविधायुक्त आपात चिकित्सा केंद्र) को शुरू करने की मांग को चल रहे आंदोलन को दूसरा महीना शुरू हो गया, लेकिन ट्रामा सेंटर शुरू होना मौजूदा हालात में कतई मुमकिन नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ने ट्रॉमा सेंटर भवन में साइनबोर्ड तो लगा दिया है, लेकिन इमरजेंसी इलाज की रत्तीभर व्यवस्था नहीं की है। फिलहाल इस भवन के कुछ कमरे अस्पताल के बाबुओं के काम आ रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


इमरजेंसी में इलाज के जरिए जिंदगी बचाने के लिए बने इस ट्रॉमा सेंटर भवन को जनवरी 2016 में स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित किया गया। ट्रॉमा सेंटर के चालू नहीं होने से दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल होने वाले रोगियों को इलाज मिलता पर इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है।

इसे संचालित करने के लिए न मेडिकल स्टाफ है और नहीं उपकरण हैं। विभाग ने भवन में ट्रॉमा सेंटर लिख भर दिया है, मगर इसमें अस्पताल चलने के बजाय अस्पताल का प्रशासनिक कामकाज संचालित हो रहा है। प्राथमिक इलाज के बाद हायर सेंटर भेजना मजबूरी बन गया है।

हालांकि, ट्रॉमा सेंटर के शुरू होने का लाभ लोहाघाट, बाराकोट, पाटी के अलावा जिले से लगी नेपाल सीमा के लोगों को भी मिलता। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि इस साल अब तक हुई दुर्घटनाओं और अन्य आपात सेवाओं के 11 लोग वक्त पर इलाज नहीं मिलने से दम तोड़ चुके हैं।

इमरजेंसी सेवा वाले ट्रॉमा सेंटर के लिए अब तक एक भी उपकरण नहीं मिला है। सीएमओ ने सवा महीने पूर्व एमआरआई यूनिट, सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड मशीन, ब्लड बैंक यूनिट, एक्सरे मशीन के लिए उच्चाधिकारियों के अलावा सांसद को भी पत्र भेजा है।


सीएमओ ने 17 अगस्त को एक डॉक्टर सहित चार कार्मिकों को ट्रॉमा सेंटर में तैनात करने के आदेश दिए। चौमेल के डा.जितेंद्र जोशी, फार्मेसिस्ट मनोज आर्या, हेल्थ विजिटर कलावती आर्या और वार्ड ब्वाय बहादुर सिंह फिरमाल को ट्रॉमा सेंटर शुरू करने की जिम्मेदारी सौंपी, मगर अभी किसी ने यहां ज्वाइन नहीं किया।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed