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पैसा खत्म होने से रुका काम

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 10 Feb 2020 10:45 PM IST
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Work stopped due to lack of budget
चंपावत में डॉक्टरों के लिए निर्माणाधीन ट्रांजिट हॉस्टल। - फोटो : CHAMPAWAT
जिले में डॉक्टरों के निर्माणाधीन ट्रांजिट हास्ॅटल (पारगमन आवास) की बहुमंजिली इमारत के काम पर ब्रेक लग गया है। ये काम किसी तकनीकी या निर्माण में कमतर गुणवत्ता की वजह से नहीं बल्कि बजट नहीं मिलने से लटक गया है।
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जिले में चंपावत और पाटी में 5.40 करोड़ रुपये से निर्माणाधीन ट्रांजिट हॉस्टल में 20 डॉक्टरों के लिए आवासीय सुविधा मिलनी थी। चंपावत में 2.80 करोड़ रुपये से 12 और पाटी में 2.60 करोड़ रुपये से आठ आवास बनने थे लेकिन इनमें से महज 60-60 लाख रुपये ही दोनों जगह मिल सका था।
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निर्माणदायी संस्था पेयजल निर्माण निगम का कहना है कि धन खत्म होने से इस साल जनवरी से काम बंद हो गया है। जबकि हॉस्टल को दिसंबर 2020 तक पूरा होना था। इधर सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि बजट रिलीज करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक को पत्र भेजा गया है।
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इधर देरी ने बढ़ा दी 3.53 करोड़ की निर्माण लागत
चंपावत। दो ट्रांजिट हॉस्टल का काम बजट नहीं मिलने से लटक गया है लेकिन चंपावत जिला अस्पताल में डॉक्टरों व पैरा मेडिकल स्टाफ के लिए निर्माणाधीन आवास को तो 2012 से धन नहीं मिला है। इसक चलते निर्माण सात साल से अधिक समय से बंद है। बजट में देरी से निर्माण की लागत में 3.53 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हो गई है।

जिला अस्पताल में इस वक्त 18 डॉक्टरों सहित 70 से अधिक कर्मी हैं लेकिन इनमें से अधिकतर के लिए आवास की व्यवस्था नहीं है। कॉलोनी का निर्माण अधूरा रहने से आवासीय व्यवस्था अस्पताल परिसर में नहीं हो पा रही है। मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. आरके जोशी का कहना है कि आवास नहीं होने से स्टाफ को अस्पताल से दूर किराए पर मकान लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। इस दूरी का असर इमरजेंसी सेवा पर पड़ रहा है। उप्र राजकीय निर्माण निगम का कहना है कि 4.01 करोड़ से बनने वाली आवासीय कॉलोनी की लागत बढ़कर 7.54 करोड़ हो चुकी है। अब तक महज 1.80 करोड़ ही मिले हैं। काम शुरू करवाने के लिए 5.73 करोड़ रुपये की मांग की गई है।
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