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बजट के अभाव में पेड़ों की गिनती का कार्य बंद हुआ
अमर उजाला ब्यूूूूराे चंपावत
Updated Wed, 03 Jan 2018 10:38 PM IST
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पंचेश्वर में इसी संगम स्थल में प्रस्तावित है बहुउद्देशीय बांध परियोजना।
- फोटो : अमर उजाला
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चंपावत। अरबों की लागत से बनने वाली पंचेश्वर बांध परियोजना के लिए फिलहाल 22 लाख रुपये भारी पड़ रहे हैं। यह राशि न मिलने से परियोजना के अंतर्गत 26 दिसंबर से शुरू हुई पेड़ों की गिनती के कार्य पर विराम लग गया है। वन विभाग ने बांध परियोजना के डूब क्षेत्र में आ रहे पेड़ों की गिनती करना बुधवार से बंद कर दिया है। विभाग को पेड़ गिनने के लिए अभी तक एक भी रुपया नहीं मिल पाना इसका मुख्य कारण बना हुआ है।
काली कुमाऊं के वन क्षेत्राधिकारी हेम चंद्र गहतोड़ी ने बताया कि पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले इलाकों में 26 दिसंबर से पेड़ों की गिनती शुरू की गई। दो जनवरी तक छह टीमों ने पेड़ों को गिनने का काम किया। इसके अंतर्गत तोलागांव, सुंगारखाल, कोठेरा, बेट्टा, नेत्र सलान, बरयूड़ी आदि इलाके में करीब 24 हजार पेड़ों को गिना गया। इनमें मुख्य रूप से साल, चीड़, साल प्रजाति के पेड़ शामिल हैं। चिल्रियां पुल, तामली, किमतोली, रौसाल और लोहाघाट क्षेत्र में पेड़ों की गिनती के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गईं।
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पेड़ों की गिनती और सीमांकन के लिए रंग, ब्रुश और मजदूरों की व्यवस्था वन विभाग ने की। मजदूरों को दैनिक आधार पर मजदूरी देनी थी। लेकिन अभी तक वन विभाग को एक भी रुपया पेड़ों की गिनती के लिए नहीं दिया गया। जबकि वन विभाग ने पिछले साल 22 सितंबर को शासन को पत्र भेजा था। विभाग ने इसके बाद 15 दिसंबर को भी चिट्ठी भेजी। लेकिन फिर भी एक भी रुपया नहीं मिला।
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कोट
पंचेश्वर डूब क्षेत्रों के पेड़ों की गिनती के लिए वन विभाग ने 22 लाख रुपये की मांग की थी। इस रकम के लिए वैप्कोस कंपनी को लिखा गया है। कंपनी द्वारा धन मिलने के बाद ये धनराशि वन विभाग को दे दी जाएगी।
हेमंत कुमार वर्मा,
एडीएम, चंपावत।