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दो शिक्षक भी नहीं दे पा रही है सरकार
ब्यूरो/ अमर उजाला, चंपावत
Updated Wed, 03 May 2017 09:53 PM IST
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शिक्षा व्यवस्था का हाल यह है कि एक स्कूल में अभिभावकों को अपने स्तर से दो शिक्षक तैनात करने पड़े।
यह व्यवस्था शिक्षक अभिभावक संघ ने अपने स्तर से की है और कई अभिभावकों की ओर से खर्च न उठा पाने की मजबूरी के चलते अब यह व्यवस्था भी किसी समय दम तोड़ सकती है। रिक्त शिक्षकों के पद भरने के लिए बुधवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने करीब 60 किलोमीटर की दूरी भी तय की, लेकिन इस कोशिश का फायदा भी शायद ही इस प्रतिनिधिमंडल को मिल पाए।
पाटी विकासखंड के श्रीसिद्ध रीठाखाल राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) में शिक्षकों की कमी का ही आलम है कि शिक्षक-अभिभावक संघ ने दो शिक्षकों की व्यवस्था की हुई है। ज्यादातर अभिभावकों की कमजोर माली हालत के चलते अब ये व्यवस्था लंबे समय तक न चल पाने की बात भी की जा रही है। बुधवार को शिक्षकों की तैनाती की मांग को लेकर अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) के अध्यक्ष लीलाधर भट्ट एवं स्कूल प्रबंध समिति के अध्यक्ष मोहन सिंह बोहरा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल 60 किलोमीटर दूर चंपावत पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन भेजकर शिक्षकों के रिक्त छह पदों को भरने की मांग की।
2011 में हाइस्कूल से अपग्रेड होकर रीठाखाल जीआईसी बना, लेकिन प्रवक्ता के पदों का सृजन नहीं हुआ। दिसंबर 2016 में पद सृजित हुए, लेकिन अधिकांश पदों पर तैनाती नहीं हुई। रीठाखाल में शिक्षकों की कमी से 450 छात्र-छात्राओं का भविष्य चौपट हो रहा है। एलटी में दो (विज्ञान एवं अंग्रेजी) और प्रवक्ता स्तर पर चार विषयों (हिंदी, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, इतिहास) के प्रवक्ताओं के पद खाली हैं।
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इसके अलावा प्रधानाचार्य, प्रशासनिक अधिकारी, कनिष्ठ सहायक के पद भी रिक्त हैं। शिक्षकों की कमी के बावजूद पिछले साल हाइस्कूल की छात्रा यमुना भट्ट ने मेरिट में जगह बनाई। रिक्त पदों पर तैनाती नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है। मुख्य शिक्षाधिकारी दिलेर सिंह राजपूत का कहना है कि रिक्त शिक्षकों के पदों को भरने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भी भेजा गया है।
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यह व्यवस्था शिक्षक अभिभावक संघ ने अपने स्तर से की है और कई अभिभावकों की ओर से खर्च न उठा पाने की मजबूरी के चलते अब यह व्यवस्था भी किसी समय दम तोड़ सकती है। रिक्त शिक्षकों के पद भरने के लिए बुधवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने करीब 60 किलोमीटर की दूरी भी तय की, लेकिन इस कोशिश का फायदा भी शायद ही इस प्रतिनिधिमंडल को मिल पाए।
पाटी विकासखंड के श्रीसिद्ध रीठाखाल राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) में शिक्षकों की कमी का ही आलम है कि शिक्षक-अभिभावक संघ ने दो शिक्षकों की व्यवस्था की हुई है। ज्यादातर अभिभावकों की कमजोर माली हालत के चलते अब ये व्यवस्था लंबे समय तक न चल पाने की बात भी की जा रही है। बुधवार को शिक्षकों की तैनाती की मांग को लेकर अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) के अध्यक्ष लीलाधर भट्ट एवं स्कूल प्रबंध समिति के अध्यक्ष मोहन सिंह बोहरा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल 60 किलोमीटर दूर चंपावत पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन भेजकर शिक्षकों के रिक्त छह पदों को भरने की मांग की।
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2011 में हाइस्कूल से अपग्रेड होकर रीठाखाल जीआईसी बना, लेकिन प्रवक्ता के पदों का सृजन नहीं हुआ। दिसंबर 2016 में पद सृजित हुए, लेकिन अधिकांश पदों पर तैनाती नहीं हुई। रीठाखाल में शिक्षकों की कमी से 450 छात्र-छात्राओं का भविष्य चौपट हो रहा है। एलटी में दो (विज्ञान एवं अंग्रेजी) और प्रवक्ता स्तर पर चार विषयों (हिंदी, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, इतिहास) के प्रवक्ताओं के पद खाली हैं।
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इसके अलावा प्रधानाचार्य, प्रशासनिक अधिकारी, कनिष्ठ सहायक के पद भी रिक्त हैं। शिक्षकों की कमी के बावजूद पिछले साल हाइस्कूल की छात्रा यमुना भट्ट ने मेरिट में जगह बनाई। रिक्त पदों पर तैनाती नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है। मुख्य शिक्षाधिकारी दिलेर सिंह राजपूत का कहना है कि रिक्त शिक्षकों के पदों को भरने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भी भेजा गया है।