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देवदार के पेड़ों की जड़ों पर डाला जा रहा निर्माण कार्यों का मलबा
Sat, 06 Apr 2019 10:50 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन
अमर उजाला ब्यूरो लोहाघाट (चंपावत)।
अमर उजाला ब्यूरो लोहाघाट (चंपावत)।
Published by: बृजमोहन बृजमोहन
Updated Sat, 06 Apr 2019 10:50 PM IST
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लोहाघाट में गैस गोदाम के पास इस तरह मिट्टी डालकर पाटे गए देवदार के वृक्ष।
- फोटो : अमर उजाला
क्षेत्र में लोगों की ओर से मनमाने तरीके से निर्माण कार्यों में निकलने वाली मिट्टी को धड़ल्ले से दुर्लभ प्रजाति के देवदार के पेड़ों की जड़ों पर डाला जा रहा है। गैस गोदाम के पास निर्माणाधीन एक मकान से निकला मलबा देवदार के आधा दर्जन से अधिक पेड़ों की जड़ पर डालकर उसे तने तक ढक दिया गया है। वन विभाग देवदार के पेड़ नगर क्षेत्र की नजूल भूमि में होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहा है। इसके चलते देवदार वृक्षों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
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पर्यावरण प्रेमी गणेशदत्त पुनेठा का कहना है कि कई लोग देवदार के पेड़ों को सुखाने के नए-नए तरीके इजाद कर रहे हैं। निर्माण कार्य से निकलने वाली मिट्टी को टिप्परों में भरकर नदी किनारे देवदार के पेड़ों की जड़ों पर डाला जा रहा है जिससे देवदार के पेड़ सूख रहे हैं।
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कई जगह लोग अपने मकानों के आगे खड़े देवदार के पेड़ों को सुखाने के लिए उनमें कील ठोकने, तार बांधने, उनकी जड़ों को खोदने, तनों को छीलने का काम कर रहे हैं लेकिन वन विभाग और प्रशासन इस पर लगाम नहीं लगा पा रहा है। बता दें कि बीते तीन दशक में नगर क्षेत्र के ढाई हजार से अधिक पेड़ों को नुकसान हो चुका है।
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इस वक्त नगर में करीब तीन हजार देवदार के पेड़ बचे हैं। प्रभागीय वनाधिकारी केएस बिष्ट का कहना था कि नजूल जमीन और वन पंचायत पर कार्यवाही करने का अधिकार वन विभाग को नहीं है। वहीं उप जिला मजिस्ट्रेट शिप्रा जोशी का कहना है कि यह मामला अभी उनकी जानकारी में आया है। मामले की जांच कराकर कार्यवाही की जाएगी।