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मुख्य पहाड़ी की दरार का शीघ्र होगा ट्रीटमेंट
राजेश देउपा/अमर उजाला, टनकपुर (चंपावत)
Updated Sun, 17 Jul 2016 10:22 PM IST
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मुख्य पहाड़ी की दरार का शीघ्र होगा ट्रीटमेंट
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर भारत के प्रसिद्ध मां पूर्णागिरि धाम की पहाड़ी पर दरार के ट्रीटमेंट की तैयारी तेज हो गई है। शासन ने पहाड़ी की भूगर्भीय जांच कर डीपीआर बनाने की जिम्मेदारी अब केदारनाथ में आपदा ट्रीटमेंट कर रही दिल्ली की वेवकोष कंपनी को सौंप दिया है। कंपनी के भू-वैज्ञानिकों की चार सदस्यीय टीम तीन दिन पहले डीपीआर बनाने को पूर्णागिरि की पहाड़ी का सर्वे कर लौट गई है। यह टीम लोनिवि के इंजीनियरों के संपर्क में रही। लोनिवि अधिकारियों ने बताया कि वेेवकोष को नवंबर तक सर्वे कर पहाड़ी के ट्रीटमेंट कार्य की डीपीआर बनाकर शासन को सौंपनी है।
पिछले कई सालों से मां पूर्णागिरि धाम के मुख्य मंदिर की पहाड़ी धीरे-धीरे दरक रही है, जिससे मंदिर के अस्तित्व में खतरा बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2013 की आपदा के बाद से खतरा अधिक बना है। इसके लिए निरंतर पहाड़ी के ट्रीटमेंट की मांग उठ रही है। वर्तमान में मुख्य मंदिर की पहाड़ी पर दरार से भू-वैैैज्ञानिकों की टीम और प्रशासन पहले ही खतरे का अंदेशा जता चुके हैं। पूर्व में भू-वैज्ञानिकों ने सर्वे कर पहाड़ी के ट्रीटमेंट का कार्य किसी अनुभवी कंपनी को सौंपने की सलाह दी थी। शासन ने वर्ष 2003 में 1.25 करोड़ बजट आवंटित कर लोनिवि को ट्रीटमेंट कार्य का जिम्मा सौंपा, फिर यह जिम्मेदारी लोनिवि से हटाकर कुमाऊं मंडल विकास निगम को सौंपी गई और अब उत्तराखंड अवस्थापना प्रकोष्ठ को बजट ट्रांसफर कर पहाड़ी के ट्रीटमेंट का कार्य सौंपा गया है।
डीपीआर तैयार करने का काम केदारनाथ आपदा का ट्रीटमेंट कर रही वेवकोष कंपनी को सौंपा गया है। लोनिवि के सहायक अभियंता एपीएस बिष्ट और जेई वीएस पोखरिया ने बताया कि 14 जुलाई को वेवकोष कंपनी के मुख्य भू वैज्ञानिक और प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर समेत चार भू-वैज्ञानिकों की टीम पहाड़ी के भूगर्भीय जांच को आई थी, जो सर्वे कर लौट गई है। उन्होंने भू-वैज्ञानिकों की टीम से हुई वार्ता का हवाला देते हुए बताया कि वेवकोष कंपनी को नवंबर तक पहाड़ी के ट्रीटमेंट की डीपीआर तैयार कर शासन को सौंपनी है।
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पिछले कई सालों से मां पूर्णागिरि धाम के मुख्य मंदिर की पहाड़ी धीरे-धीरे दरक रही है, जिससे मंदिर के अस्तित्व में खतरा बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2013 की आपदा के बाद से खतरा अधिक बना है। इसके लिए निरंतर पहाड़ी के ट्रीटमेंट की मांग उठ रही है। वर्तमान में मुख्य मंदिर की पहाड़ी पर दरार से भू-वैैैज्ञानिकों की टीम और प्रशासन पहले ही खतरे का अंदेशा जता चुके हैं। पूर्व में भू-वैज्ञानिकों ने सर्वे कर पहाड़ी के ट्रीटमेंट का कार्य किसी अनुभवी कंपनी को सौंपने की सलाह दी थी। शासन ने वर्ष 2003 में 1.25 करोड़ बजट आवंटित कर लोनिवि को ट्रीटमेंट कार्य का जिम्मा सौंपा, फिर यह जिम्मेदारी लोनिवि से हटाकर कुमाऊं मंडल विकास निगम को सौंपी गई और अब उत्तराखंड अवस्थापना प्रकोष्ठ को बजट ट्रांसफर कर पहाड़ी के ट्रीटमेंट का कार्य सौंपा गया है।
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डीपीआर तैयार करने का काम केदारनाथ आपदा का ट्रीटमेंट कर रही वेवकोष कंपनी को सौंपा गया है। लोनिवि के सहायक अभियंता एपीएस बिष्ट और जेई वीएस पोखरिया ने बताया कि 14 जुलाई को वेवकोष कंपनी के मुख्य भू वैज्ञानिक और प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर समेत चार भू-वैज्ञानिकों की टीम पहाड़ी के भूगर्भीय जांच को आई थी, जो सर्वे कर लौट गई है। उन्होंने भू-वैज्ञानिकों की टीम से हुई वार्ता का हवाला देते हुए बताया कि वेवकोष कंपनी को नवंबर तक पहाड़ी के ट्रीटमेंट की डीपीआर तैयार कर शासन को सौंपनी है।
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