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झूमाधुरी में चार दिनी नंदाष्टमी महोत्सव आज से
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट।
Updated Mon, 05 Sep 2016 11:56 PM IST
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लोहाघाट। झूमाधुरी नंदाष्टमी महोत्सव का मंगलवार को क्षेत्रीय विधायक पूरन सिंह फर्त्याल शाम चार बजे उद्घाटन करेंगे। इस दौरान महिलाओं और बालिकाओं की ओर से कलश यात्रा निकाली जाएगी। महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष मोहन चंद्र पाटनी के अनुसार महोत्सव के दौरान स्कूली बच्चों की विभिन्न खेलकूद, शैक्षिक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
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साथ ही विभिन्न सांस्कृतिक दलों की ओर से रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। जिला पंचायत अध्यक्ष खुशाल सिंह अधिकारी सांस्कृतिक संध्या का उद्घाटन करेंगे। उन्होंने बताया कि नौ सितंबर को दोपहर बाद पाटन पाटनी और राईकोट महर से मां भगवती, मां महाकाली की डोला यात्राएं निकलेंगी। महोत्सव को भव्य रूप देेने के लिए ग्राम प्रधान सुभाष विश्वकर्मा, गोविंद पाटनी, हरीश पाटनी, भगवान विश्वकर्मा, बसंत विश्वकर्मा, मुरली पांडेय, रमेश पाटनी आदि जुटे हैं।
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लोहाघाट (चंपावत)। करीब साढे़ पांच हजार फीट की ऊंचाई में स्थित झूमाधुरी का देवी मंदिर निसंतान महिलाओं की कोख भरने के लिए प्रसिद्ध रहा है। इस शैल शिखर से बद्रीनाथ, केदारनाथ, नंदाकोट, कैलाश के दर्शन होते हैं। यहां पहुंचते ही व्यक्ति दैवी शक्ति से साक्षात्कार करने लगता है। पहले इस स्थान में झुमा नाम की साध्वी ने देवी की आराधना की थी। उनकी भक्ति से प्रभावित होकर देवी ने साक्षात दर्शन दिए।
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तब से इस स्थान का नाम झूमाधुरी कहलाने लगा। बाद में एक निसंतान राजमिस्त्री को मां ने स्वप्न में दर्शन देकर इस स्थल में मंदिर का निर्माण करने को कहा। राजमिस्त्री ने पाटन के विद्वान पुरोहितों से संपर्क कर शुभ मुहूर्त मे मंदिर का निर्माण किया तो एक वर्ष में उनके यहां बच्चे ने किलकारी ली। तब से इस स्थान में नंदाष्टमी के अवसर पर मेला लगता आ रहा है।
पहले इस स्थान में पहुंचने के लिए उबड़-खाबड़ और पथरीला रास्ता था। अब यहां का मार्ग सुगम होने के साथ बिजली की सुविधा से भी जुड़ गया है। पाटन-पाटनी और राईकोट से यहां मुख्य मेले के दिन देवी रथ यात्राए निकलती है। दुर्गम पहाड़ी मार्ग की खड़ी चढ़ाई से जब रथ निकलते हैं, उस वक्त देवी शक्ति का चमत्कार देखने को मिलता हैं।