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रंगकर्मी देव सिंह तड़ागी नहीं रहे 

Tue, 10 Jan 2017 10:44 PM IST
सतीश जोशी ‘सत्तू’ /अमर उजाला, चंपावत
सतीश जोशी ‘सत्तू’ /अमर उजाला, चंपावत Updated Tue, 10 Jan 2017 10:44 PM IST
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There are theater Tdhagi
रंगकर्मी तड़ागी नहीं रहे  - फोटो : अमर उजाला
जिले के मशहूर रंगकर्मी और सामाजिक कार्यकर्ता देव सिंह तड़ागी का मंगलवार को 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया। देव सिंह तड़ागी लंबे समय से कुमाऊंनी बोली के साथ ही कुमाऊंनी संस्कृति को सहेजने में जुटे थे। रंगकर्मियों का कहना है कि उनके निधन से कुमाऊं में एक सांस्कृतिक युग का अवसान हो गया है। 
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स्वर्गीय तड़ागी ने कुमाऊं की खड़ी होली गायन के साथ ही रामलीला गायन को नया आयाम दिया था। उनके सहयोगी रहे राजेंद्र प्रसाद गहतोड़ी बताते हैं कि वर्ष 1998 में युगमंच के साथ जुड़कर कुमाऊंनी खड़ी होली की आडियो कैसेट कैसे खेलें फाग का निर्माण किया।
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इस ऑडियो कैसेट का विमोचन ऐतिहासिक बालेश्वर मंदिर समूह में किया गया था, जहां लोगों ने ऑडियो कैसेट को हाथों हाथ लिया। उसके बाद उन्होंने वर्ष 2000 में नैनीताल राजभवन में चंपावत जिले की होली टीम का नेतृत्व किया था। उसके बाद यह सिलसिला 2016 तक चलता रहा। उनके परिजन बताते हैं कि वह नए कलाकारों को गायन शैली के अभिनय का लगातार प्रशिक्षण देते रहते थे। उन्हें कुमाऊंनी बोली और संस्कृति से काफी लगाव था। नए कलाकारों को प्रशिक्षण देने के दौरान उन्हें अपने खाने पीने की सुध भी नहीं रहती थी।
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रामलीला मंचन में करते रहते थे नए प्रयोग
रंगकर्मी देव सिंह तड़ागी तल्लीहाट सहित कई स्थानों में रामलीला मंचन कराते थे। रामलीला मंचन के दौरान विभिन्न दृश्यों को नए अंदाज में मंचित करने में उनका कोई सानी नहीं था। रामलीला देखने वाले अधिकांश दर्शक केवल देव सिंह तड़ागी की ओर से किए जाने वाले नए नए प्रयोगों को ही देखने आते थे। वर्तमान में चंपावत रामलीला कमेटी के अध्यक्ष भगवतशरण राय का कहना है कि तड़ागी को रामलीला में संगीत की अच्छी पकड़ थी। वह विभिन्न रागों और ठुमरी पर आधारित रामलीला के बोलों को गाने में सिद्धहस्त थे।



पहले कुमाऊं महोत्सव के लोकनृत्य समिति प्रमुख भी रहे
रंगकर्मी देव सिंह तड़ागी एकीकृत उत्तर प्रदेश के समय में वर्ष 1998 में चंपावत जिला मुख्यालय में हुए पहले कुमाऊं महोत्सव की लोकनृत्य समिति के अध्यक्ष भी रहे। कुमाऊंनी भाषा के लोकप्रिय गायक सुरेश राजन, कुमाऊं लोक कला दर्पण के निदेशक भैरव राय, रंगकर्मी प्रकाश राय, जीवन सिंह मेहता, भूपेश देव, राजेंद्र प्रसाद गहतोड़ी, राजेश चौबे, मदन सिंह महर, देवेंद्र ओली, जीवन बोडियाल आदि का कहना है कि तड़ागी के निधन से सांस्कृतिक क्षेत्र की अपूर्णनीय क्षति हुई है। विभिन्न संगठनों ने उनके निधन पर शोक संवेदना प्रकट की है। 
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