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चंपावत हादसा : शहनाई की गूंज बाद मातम का सन्नाटा

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 22 Feb 2022 11:57 PM IST
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The joys of marriage turned into mourning
ककनई के पास जीप हादसे में मृतकों के परिजनों को सांत्वना देतीं ग्रामीण महिलाएं। संवाद न्यूज एजें? - फोटो : TANAKPUR
चंपावत। एक हादसे ने पलभर में उल्लास को मातम में तब्दील कर दिया। ककनई में गहरी खाई में गिरी जीप ने क्षणभर में शहनाई की मधुर गूंज को मातम की धुन में बदल दिया। नीमा देवी के साथ सात फेरे कर मनोज सिंह ककनई घर पहुंचे, तो गाजे-बाजे और शगुन के गीत चल रहे थे। अभी रात का खाना भी नहीं हुआ था, रात 12 बजे के कुछ बाद एक कॉल ने सबकी पांव से जमीन खिसका दी। जीप के घर नहीं पहुंचने के साथ बरात की जीप के हादसे की भनक से सब सदमे में आ गए। नाचना-गाना सब बंद हुआ। जश्न मना रहे लोगों में से युवा और कुछ बुजुर्ग रात डेढ़ बजे मौके पर पहुंचे। गांव के युवा गेलनों में पानी लाए, ताकि घायलों की जिंदगी बचाई जा सकी लेकिन कुदरत को यह मंजूर नहीं था। रात के अंधेरे में न जीप का पता था न हताहत लोगों तक पहुंचना मुमकिन था।
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घायल जीप चालक प्रकाश राम और उसके साथ बच गया यात्री त्रिलोक राम दोनों बदहवास थे। जीप नहीं पहुंचने पर चालक को रात 12 बजे के करीब जब गांव से कॉल आई, तो हादसे का पता चला लेकिन तब तक इस बात का भान नहीं था कि हताहत होने वालों की तादात 14 तक हो सकती है। डांडा और ककनई के आसपास के नौ परिवार उजड़ गए। दो गांवों से एक साथ नौ लोगों की अर्थी उठी तो लोग रो पड़े।
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... ढेकाढूंगा से डरने लगे हैं गांव के लोग
चंपावत। ककनई में बरात की जीप जिस जगह पर गिरी है, वह तकरीबन ढेकाढूंगा गांव है। इस जगह पर 2015 में एसडीएम सड़क की कटिंग के दौरान 32 साल के त्रिलोक सिंह की मौत हो गई थी। इसके बाद से यहां हर साल कोई न कोई दुर्घटना होती है। छह सालों 15 से अधिक हादसे हो चुके हैं लेकिन इसमें से किसी की जिंदगी नहीं गई। धन सिंह महरा कहते हैं कि इस स्थान पर आवाजाही में लगातार खतरा रहता है। यहां अकाल मौत के शिकार त्रिलोक सिंह की स्मृति में न स्मृति पटल बना है और न ही यहां कोई मंदिर बना है। अब ग्रामीण इस स्थान पर मंदिर निर्माण की मांग कर रहे हैं।
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