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अब खगोलीय गतिविधियों को जान सकेंगे छात्र
अमर उजाला ब्यूूूूराे चंपावत
Updated Mon, 25 Dec 2017 11:05 PM IST
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चंपावत जवाहर नवोदय विद्यालय में दूरबीन लगाते वैज्ञानिक।
- फोटो : अमर उजाला
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अब केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा संचालित जवाहर नवोदय विद्यालय (जेएनवी) के बच्चे अंतरिक्ष में होने वाली गतिविधियों के गवाह बन सकेंगे। दरअसल यहां एक दूरबीन (टेलीस्कोप) लगा दी गई है। चंपावत नवोदय विद्यालय सूबे का पहला स्कूल होगा, जहां दूरबीन लगाई गई है। इसे लगाने का मकसद छात्रों में खगोल विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाना है।
प्राचार्या बीनू जैन ने बताया कि विद्यालय में दूरबीन की स्थापना कर दी गई है। दूरबीन को स्वयंसेवी संस्था हिमवत्स की मदद से मुंबई से मंगवाया गया है। 30 हजार रुपये की लागत वाली दूरबीन को प्रयोगशाला निधि से खरीदा गया है। दूरबीन लगाने को हिमवत्स संस्था से जुड़े भारतीय तकनीकी संस्थान (आईआईटी) चेन्नई में कार्यरत डॉ. प्रेमबल्लभ बिष्ट और रितेश राय की मदद ली गई।
प्राचार्या ने बताया कि दूरबीन लगाने का मकसद छात्र-छात्राओं को अंतरिक्ष का ज्ञान देने के अलावा अनुसंधान की तरफ रुचि बढ़ाना है।
बताया कि दूरबीन के जरिये सौरमंडल की गतिविधि, चंद्रमा का अध्ययन, सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण को बेहद नजदीक से और आसानी से देखा जा सकेगा। प्राचार्या बीनू जैन ने बताया कि कुछ समय बाद दूरबीन से नवोदय के अलावा अन्य विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को भी अंतरिक्ष की घटनाओं से रूबरू कराया जाएगा।
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प्राचार्या बीनू जैन ने बताया कि विद्यालय में दूरबीन की स्थापना कर दी गई है। दूरबीन को स्वयंसेवी संस्था हिमवत्स की मदद से मुंबई से मंगवाया गया है। 30 हजार रुपये की लागत वाली दूरबीन को प्रयोगशाला निधि से खरीदा गया है। दूरबीन लगाने को हिमवत्स संस्था से जुड़े भारतीय तकनीकी संस्थान (आईआईटी) चेन्नई में कार्यरत डॉ. प्रेमबल्लभ बिष्ट और रितेश राय की मदद ली गई।
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प्राचार्या ने बताया कि दूरबीन लगाने का मकसद छात्र-छात्राओं को अंतरिक्ष का ज्ञान देने के अलावा अनुसंधान की तरफ रुचि बढ़ाना है।
बताया कि दूरबीन के जरिये सौरमंडल की गतिविधि, चंद्रमा का अध्ययन, सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण को बेहद नजदीक से और आसानी से देखा जा सकेगा। प्राचार्या बीनू जैन ने बताया कि कुछ समय बाद दूरबीन से नवोदय के अलावा अन्य विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को भी अंतरिक्ष की घटनाओं से रूबरू कराया जाएगा।
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