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छात्राओं के सिर में पानी की बाल्टी
ब्यूराे/अमर उजाला, चंपावत
Updated Sun, 10 Apr 2016 10:29 PM IST
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छात्राओं के सिर में पानी की बाल्टी
- फोटो : अमर उजाला
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अंजलि, सपना, आशा, दीपा सहित कई छात्राओं के सिर में पानी की बाल्टी है। प्राइमरी की ये छात्राएं पानी अपने घरों के लिए नहीं, बल्कि स्कूल के लिए ढो रही है। पढ़ाई छोड़ पानी भरने की ये मजबूरी इसलिए ताकि मध्याह्न भोजन (एमडीएम) बन सके। स्कूल के ये हाल पेयजल कनेक्शन होने के बावजूद हैं। इस नल में करीब एक महीने से एक भी बूंद पानी नहीं टपका। छात्राओं को पानी के लिए करीब 2.5 किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ रही है।
स्कूल होते तो पढ़ने के लिए हैं, मगर यहां से 27 किलोमीटर दूर दियूरी में पानी भरना भी छात्राओं की मजबूरी बन गया है। दियूरी प्राथमिक विद्यालय पहाड़ के सबसे पुराने स्कूलों में से एक है। लेकिन यहां के 65 छात्र-छात्राओं को एमडीएम तो छोड़िए, पीने के लिए एक घूंट भी पानी नहीं है। एमडीएम बनाने के लिए भी यहां की छात्राओं को पानी ढोना पड़ रहा है। स्कूल से तकरीबन 1.25 किमी दूर संपाल नौले से पानी लाने के लिए आने और जाने में करीब एक घंटे का समय लगता है। इस दौरान पानी लाने वाली छात्राओं की पढ़ाई पर ब्रेक लग जाता है। पानी नहीं होने से शौचालयों का भी उपयोग नहीं हो पा रहा है। वहीं अंधड़ में इस शौचालय का दरवाजा भी टूटा है। जल संस्थान के जूनियर इंजीनियर एसएस थापा का कहना है कि स्रोत में आई गिरावट से पानी यहां तक नहीं पहुंच पा रहा है।
पुरानी इमारत में दरार, एक कमरे में चल रही दो कक्षाएं
दियूरी प्राइमरी बेशक सबसे पुराने स्कूलों में से एक है, लेकिन यहां की हालत कतई ठीक नहीं है। 1972 में बना भवन तो बेहद जीर्णशीर्ण हो गया है। इस इमारत में जगह-जगह दरार है। अभिभावक प्रकाश राम, अर्जुन, भैरव राम, शंकर सिंह, नाथ सिंह आदि का कहना है कि स्कूल भवन की हालत से उनके बच्चे डर के बीच यहां पढ़ाई कर रहे हैं। 2004 में बने नए भवन में सभी पांचों कक्षाओं के लिए जगह नहीं है। लिंटर का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त है। बरसात में यह भवन भी टपकता है। इस कारण यहां एक कमरे में दो-दो कक्षाएं चल रही हैं। एक साथ दो कक्षाएं चलने से बच्चों के लिए पढ़ाया हुआ समझना कठिन हो रहा है। प्रधानाध्यापक मनोज कुमार का कहना है कि एक कमरे में दो-दो कक्षाएं चलने से पढ़ाई पर असर पड़ता है।
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मुआयने के बाद सुरक्षागत कारणों से यहां पुराने भवन में कक्षाओं के संचालन नहीं करने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही नए भवन के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। वहीं पेयजल की व्यवस्था को बेहतर करने के लिए स्वजल के जरिए प्रयास किए जा रहे हैं।हयात सिंह मियान खंड शिक्षाधिकारी, चंपावत।
बीते करीब एक माह से गहराए पेयजल संकट से स्कूल में एमडीएम का संचालन कठिन हो गया है। इसे जारी रखने के लिए छोटे बच्चों को चढ़ाई वाले रास्तों में एक किमी से अधिक दूरी तय कर पानी ढोना पड़ रहा है। जिससे पढ़ाई पर भी असर पड़ रहा है। वहीं स्कूल भवन की जीर्णशीर्ण हालत हर वक्त खतरे का आहट पैदा करती है। पेयजल व्यवस्था ठीक करने के साथ ही स्कूल भवन की मरम्मत अथवा नए भवन का निर्माण बेहद जरूरी है।
दीपक नेगी अध्यक्ष, विद्यालय प्रबंध समिति,दियूरी।
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स्कूल होते तो पढ़ने के लिए हैं, मगर यहां से 27 किलोमीटर दूर दियूरी में पानी भरना भी छात्राओं की मजबूरी बन गया है। दियूरी प्राथमिक विद्यालय पहाड़ के सबसे पुराने स्कूलों में से एक है। लेकिन यहां के 65 छात्र-छात्राओं को एमडीएम तो छोड़िए, पीने के लिए एक घूंट भी पानी नहीं है। एमडीएम बनाने के लिए भी यहां की छात्राओं को पानी ढोना पड़ रहा है। स्कूल से तकरीबन 1.25 किमी दूर संपाल नौले से पानी लाने के लिए आने और जाने में करीब एक घंटे का समय लगता है। इस दौरान पानी लाने वाली छात्राओं की पढ़ाई पर ब्रेक लग जाता है। पानी नहीं होने से शौचालयों का भी उपयोग नहीं हो पा रहा है। वहीं अंधड़ में इस शौचालय का दरवाजा भी टूटा है। जल संस्थान के जूनियर इंजीनियर एसएस थापा का कहना है कि स्रोत में आई गिरावट से पानी यहां तक नहीं पहुंच पा रहा है।
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पुरानी इमारत में दरार, एक कमरे में चल रही दो कक्षाएं
दियूरी प्राइमरी बेशक सबसे पुराने स्कूलों में से एक है, लेकिन यहां की हालत कतई ठीक नहीं है। 1972 में बना भवन तो बेहद जीर्णशीर्ण हो गया है। इस इमारत में जगह-जगह दरार है। अभिभावक प्रकाश राम, अर्जुन, भैरव राम, शंकर सिंह, नाथ सिंह आदि का कहना है कि स्कूल भवन की हालत से उनके बच्चे डर के बीच यहां पढ़ाई कर रहे हैं। 2004 में बने नए भवन में सभी पांचों कक्षाओं के लिए जगह नहीं है। लिंटर का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त है। बरसात में यह भवन भी टपकता है। इस कारण यहां एक कमरे में दो-दो कक्षाएं चल रही हैं। एक साथ दो कक्षाएं चलने से बच्चों के लिए पढ़ाया हुआ समझना कठिन हो रहा है। प्रधानाध्यापक मनोज कुमार का कहना है कि एक कमरे में दो-दो कक्षाएं चलने से पढ़ाई पर असर पड़ता है।
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मुआयने के बाद सुरक्षागत कारणों से यहां पुराने भवन में कक्षाओं के संचालन नहीं करने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही नए भवन के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। वहीं पेयजल की व्यवस्था को बेहतर करने के लिए स्वजल के जरिए प्रयास किए जा रहे हैं।हयात सिंह मियान खंड शिक्षाधिकारी, चंपावत।
बीते करीब एक माह से गहराए पेयजल संकट से स्कूल में एमडीएम का संचालन कठिन हो गया है। इसे जारी रखने के लिए छोटे बच्चों को चढ़ाई वाले रास्तों में एक किमी से अधिक दूरी तय कर पानी ढोना पड़ रहा है। जिससे पढ़ाई पर भी असर पड़ रहा है। वहीं स्कूल भवन की जीर्णशीर्ण हालत हर वक्त खतरे का आहट पैदा करती है। पेयजल व्यवस्था ठीक करने के साथ ही स्कूल भवन की मरम्मत अथवा नए भवन का निर्माण बेहद जरूरी है।
दीपक नेगी अध्यक्ष, विद्यालय प्रबंध समिति,दियूरी।