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राज्य आंदोलनकारी मंदीप लौटाएंगे दर्जा

Thu, 17 Dec 2015 10:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत Updated Thu, 17 Dec 2015 10:18 PM IST
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State agitator return a status Mandeep

पहाड़ के लोगों की अनदेखी से खफा राज्य आंदोलनकारी मंदीप सिंह ढेक 26 जनवरी 2016 को राज्य आंदोलनकारी का दर्जा (प्रमाणपत्र) वापस करेंगे और किसी भी सरकारी सुविधा का उपयोग नहीं करेंगे। उनका कहना है कि उत्तराखंड के 10 पर्वतीय जिलों की कीमत पर अधिकांश बुनियादी सुविधाएं और औद्योगिक विकास महज तीन मैदानी जिलों में हो रहा है।

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चंपावत छात्रसंघ के अध्यक्ष रह चुके मंदीप सिंह ढेक ने जारी विज्ञप्ति में कहा कि उत्तर प्रदेश में रहते हुए अलग राज्य की आवाज उठने की जो वजहें थीं, वे आज भी ज्यों की त्यों बनी हुई हैं। पहाड़ पहले की तरह ही अब भी मैदान का उपनिवेश बना हुआ है। राज्य बने 15 साल से अधिक होने के बावजूद पहाड़ के लोगों के असल मुद्दों की सुध नहीं ली जा रही है। 
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चंपावत जिला बनने के बाद अब तक एक भी रोजगारपक उद्योग नहीं लगा, उल्टे उप्र के दौर की केएमवीएन की रोजिन टरपेंटाइन (तारपीन) फैक्ट्री बंद हो चुकी है। तल्लादेश, गुमदेश सहित नेपाल सीमा से लगे या दूरदराज के अन्य गांवों की बेसिक जरूरतों को अब तक पूरा नहीं किया जा सका है। बेरोजगार 15 महीने से बेरोजगारी भत्ते के लिए तरस रहे हैं। ब्लड बैंक से लेकर ट्रॉमा सेंटरों के भवन बनने के बावजूद वे इस्तेमाल लायक नहीं हैं।
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श्री ढेक ने कहा कि राज्य सरकारें लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप न तो योजनाएं बना सकीं और न ही उन्हें जमीन पर लागू करा सकी। प्रदेश की मौजूदा दशा के मद्देनजर उन्होंने राज्य आंदोलनकारी की सुविधाओं को वापस करने का एलान किया है। उन्हें प्रमाणपत्र के अलावा रोडवेज बसों में निशुल्क आवाजाही, स्वास्थ्य सुविधा के अलावा नौकरियों में आरक्षण की सुविधा मिली हुई है।

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