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पंचेश्वर बांध परियोजना के जल्द शुरू होने की अटकलें तेज
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत।
Updated Fri, 24 Feb 2017 10:46 PM IST
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बांध
- फोटो : अमर उजाला
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पांच दशकों से भारत और पड़ोसी मुल्क नेपाल के बीच राजनीति के केंद्र में रही प्रस्तावित पंचेश्वर बांध परियोजना की उम्मीदों को जल्द पंख लगेंगे। बांध के निर्माण को लेकर एक बार फिर से अटकलें तेज हो गई हैं। केंद्रीय जल संसाधन एवं नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के सचिव अमरजीत सिंह 25 फरवरी को पंचेश्वर में प्रस्तावित बांध स्थल का दौरा करेंगे। उसके बाद बांध के निर्माण कार्य में और तेजी आने की संभावना है। महत्वाकांक्षी परियोजना के शुरू होने की संभावनाओं को लेकर बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों में कौतूहल का माहौल है। बांध निर्माण से जहां भारत और नेपाल के 150 से अधिक गांवों को विस्थापन का दंश झेलना होगा, वहीं 10 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार का लाभ भी मिल सकेगा।
गौरतलब है कि पंचेश्वर बांध परियोजना का प्रारंभिक सर्वे साठवें दशक में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अनुसंधान एवं नियोजन विंग ने किया था। 1980 के बाद इस काम को केंद्रीय जल आयोग (सीडब्लूसी) को सौंपा गया। भारत और नेपाल सरकार ने सर्वेक्षण कार्य को युद्धस्तर पर संचालित करने के लिए वर्ष 1996 में संयुक्त परियोजना कार्यालय (जेपीओ) स्थापित किया था। दोनों देशों के बीच राजनीति के चलते यह परियोजना वर्षों तक अधर में लटकी रही, लेकिन वर्ष 2014 में केंद्र में एनडीए की सरकार बनने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेपाल दौरे के बाद परियोजना के निर्माण कार्य में तेजी आई है। प्रस्तावित परियोजना की कार्यदायी संस्था वापकोस लिमिटेड के अधिकारियों के अनुसार पंचेश्वर बांध के अलावा रूपालीगाढ़ में भी रेग्यूलेटिंग बांध का निर्माण किया जाएगा। पंचेश्वर परियोजना से 4800 मेगावाट और रूपालीगाढ़ में 240 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाना प्रस्तावित है। दोनों बांधों से पूरे शारदा रेंज की कृषि भूमि की सिंचाई की जा सकेगी।
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बांध के अनुकूल पाई गई है पहाड़ों की क्षमता
चंपावत। वापकोस कंपनी की ओर से बांध के डूब क्षेत्र का फाइनल सर्वे शुरू कर दिया गया है। अभी तक हुए सर्वेक्षणों के अनुसार यहां के पहाड़ों की क्षमता बांध के लिए अनुकूल पाई गई है। 315 मीटर ऊंचे इस बांध से 25 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र जलमग्न होगा। इसके दायरे में झूलाघाट बाजार के अलावा घाट, पनार, सरयू नदी तट पर बने पुल तथा बस्तियां जलमग्न हो जाएंगी। रॉकफिल डिजाइन से बनने वाले बांध की डीपीआर तैयार करने के साथ यहां भूकंपीय दृष्टि से भी सर्वेक्षण उपयुक्त पाया गया है।
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