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तो जल्द मिट जाएगी स्वामी जी से जुड़ी यादें
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Wed, 11 Jan 2017 10:42 PM IST
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तो जल्द मिट जाएगी स्वामी जी से जुड़ी यादें
- फोटो : अमर उजाला
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शिकागो धर्म सम्मेलन के जरिए आध्यात्मिक पताका फहराने वाले महापुरुष स्वामी विवेकानंद का भारत ही नहीं दुनियाभर में डंका है। स्वामी विवेकानंद का चंपावत जिले से भी वास्ता रहा है, लेकिन जिले में उनसे जुड़े स्थानों की उपेक्षा हो रही है। उनकी विरासत से जुड़े स्थान दीनहीन हाल में है। दियूरी के पास उनकी स्मृतियों को सहेजने वाले डाकबंगले का तो कोई खैरख्वाह तक नहीं है। यह बंगला पूरी तरह वीरान पड़ा है। यहां तक कि देखरेख के लिए एक अदद चौकीदार भी नहीं है।
हिंदू धर्म की ध्वज पताका फहराने वाले स्वामी जी के जन्मदिन 12 जनवरी को युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। स्वामी जी का चंपावत से खास रिश्ता रहा है। उनकी स्मृति से जुड़ा एक बंगला यहां से करीब 25 किमी दूर दियूरी में है। इस बंगले में स्वामी जी अपने गुरु भाई व श्रीरामकृष्ण देव के दूसरे शिष्य स्वामी सदानंद, स्वामी विरजानंद और अलावा अल्मोड़ा के लाला गोविंद लाल शाह के साथ 19 जनवरी 1901 को ठहरे थे।
अद्वैत आश्रम मायावती के दस्तावेज बताते हैं कि स्वामी जी को चंपावत से डोली के जरिए दियूरी ले जाया गया था। डाकबंगले में स्वामी जी और उनके साथियों ने घी के साथ भात खाया। दियूरी के ग्रामीण नंदाबल्लभ, मोहन राम, जोहर सिंह आदि बुजुर्गों का कहना है कि यहां के बंगले में स्वामी जी ने रात बिताई थी, मगर दो कमरे वाले इस बंगले को आध्यात्मिक धरोहर बनाना तो दूर, संवारा तक नहीं जा सका है। भवन की हालत इस लायक नहीं है कि कोई इसमें रह सके।
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पैदल यात्रियों का पड़ाव भी था
टनकपुर-अस्कोट पैदल मार्ग पर स्थित दियूरी डाक बंगले पर जिला पंचायत का स्वामित्व है। 18वीं सदी के आखिर में बना यह बंगला कभी पैदल यात्रियों का पड़ाव हुआ करता था, लेकिन इसे संवारने की कोई पहल नहीं की गई है। तीन दशक से यह रखरखाव के अभाव में है। जिला पंचायत ने भी अब तक इसके रखरखाव में धन नहीं खर्च किया। जिला पर्यटन विकास अधिकारी आरएस ऐरी का कहना है कि आध्यात्मिक प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद की स्मृति से जुड़े स्थान को सहेजने का फिलहाल कोई प्रस्ताव पर्यटन विभाग के विचारार्थ नहीं है।
स्मृति स्तंभ के हाल भी ठीक नहीं
स्वामी विवेकानंद के 1901 में हुए प्रवास के 100 साल पूरे होने पर 2001 में चंपावत में स्मृति स्तंभ बनाया गया था। यह स्तंभ स्वामी जी के चंपावत प्रवास को अक्षुण्ण रखने के लिए उनके विश्रामस्थल पर बनाया गया था, मगर यह स्मृति स्तंभ भी खराब हाल में है। स्तंभ में अंकित शब्द पढ़ने लायक नहीं रह गए हैं। जिला पंचायत के स्वामित्व वाले स्मृति स्तंभ स्थल वाले परिसर में अब किराए पर टीवी रिले केंद्र खोला गया है।
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हिंदू धर्म की ध्वज पताका फहराने वाले स्वामी जी के जन्मदिन 12 जनवरी को युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। स्वामी जी का चंपावत से खास रिश्ता रहा है। उनकी स्मृति से जुड़ा एक बंगला यहां से करीब 25 किमी दूर दियूरी में है। इस बंगले में स्वामी जी अपने गुरु भाई व श्रीरामकृष्ण देव के दूसरे शिष्य स्वामी सदानंद, स्वामी विरजानंद और अलावा अल्मोड़ा के लाला गोविंद लाल शाह के साथ 19 जनवरी 1901 को ठहरे थे।
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अद्वैत आश्रम मायावती के दस्तावेज बताते हैं कि स्वामी जी को चंपावत से डोली के जरिए दियूरी ले जाया गया था। डाकबंगले में स्वामी जी और उनके साथियों ने घी के साथ भात खाया। दियूरी के ग्रामीण नंदाबल्लभ, मोहन राम, जोहर सिंह आदि बुजुर्गों का कहना है कि यहां के बंगले में स्वामी जी ने रात बिताई थी, मगर दो कमरे वाले इस बंगले को आध्यात्मिक धरोहर बनाना तो दूर, संवारा तक नहीं जा सका है। भवन की हालत इस लायक नहीं है कि कोई इसमें रह सके।
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पैदल यात्रियों का पड़ाव भी था
टनकपुर-अस्कोट पैदल मार्ग पर स्थित दियूरी डाक बंगले पर जिला पंचायत का स्वामित्व है। 18वीं सदी के आखिर में बना यह बंगला कभी पैदल यात्रियों का पड़ाव हुआ करता था, लेकिन इसे संवारने की कोई पहल नहीं की गई है। तीन दशक से यह रखरखाव के अभाव में है। जिला पंचायत ने भी अब तक इसके रखरखाव में धन नहीं खर्च किया। जिला पर्यटन विकास अधिकारी आरएस ऐरी का कहना है कि आध्यात्मिक प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद की स्मृति से जुड़े स्थान को सहेजने का फिलहाल कोई प्रस्ताव पर्यटन विभाग के विचारार्थ नहीं है।
स्मृति स्तंभ के हाल भी ठीक नहीं
स्वामी विवेकानंद के 1901 में हुए प्रवास के 100 साल पूरे होने पर 2001 में चंपावत में स्मृति स्तंभ बनाया गया था। यह स्तंभ स्वामी जी के चंपावत प्रवास को अक्षुण्ण रखने के लिए उनके विश्रामस्थल पर बनाया गया था, मगर यह स्मृति स्तंभ भी खराब हाल में है। स्तंभ में अंकित शब्द पढ़ने लायक नहीं रह गए हैं। जिला पंचायत के स्वामित्व वाले स्मृति स्तंभ स्थल वाले परिसर में अब किराए पर टीवी रिले केंद्र खोला गया है।