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खतरे के चलते ध्वस्त होगा मां पूर्णागिरि धाम का शौचालय!

Wed, 07 Oct 2015 11:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत Updated Wed, 07 Oct 2015 11:04 PM IST
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Purnagiri mother's toilet shrine

मां पूर्णागिरि दरबार धर्म और आस्था का धाम है पर यहां भी निर्माणदाई संस्थाओं की अंधेरगर्दी कम नहीं है। तीर्थयात्रियों को सुविधा देने के लिए 11 लाख रुपये में बनाए गए शौचालय का भी उपयोग यहां नहीं हो सका। एक भी दिन इन शौचालयों का उपयोग नहीं हुआ और अब खतरे की जद में आ रहे इस भवन को गिराने पर विचार हो रहा है।

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मां पूर्णागिरि धाम में राष्ट्रीय सम विकास योजना से 2011 में 11 लाख रुपये से 10 सीट वाला शौचालय बना। मानव सेवा संस्थान ने इस शौचालय को बनाया, लेकिन शौचालय भवन में फर्श से लेकर कई खामियां रह गई। नतीजतन पानी होने के बावजूद इसका कभी इस्तेमाल नहीं हो सका।
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टनकपुर के एसडीएम नरेश दुर्गापाल ने टुन्नास क्षेत्र में बने इस शौचालय का मुआयना किया। उनका कहना है कि घटिया गुणवत्ता के चलते यह भवन गिरने की कगार पर है। शौचालय भवन के पिछले हिस्से में दरारें हैं। खंड विकास अधिकारी को पत्र भेजकर एसडीएम ने शौचालय की स्थिति का तकनीकी परीक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। रिपेयर करने अथवा रिपेयर नहीं होने की सूरत में शौचालय भवन को गिराने को कहा गया है।
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बनने के बाद से नहीं हुआ उपयोग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान ने गंदगी के खिलाफ बिगुल बजाया है, मगर यहां फिर भी हालत में खास सुधार नहीं हुआ है। सिन्याड़ी में 2008 में बने शौचालय का कभी उपयोग नहीं हो सका है। ऐसी ही तस्वीर सेनानियों के गढ़ सूखीढांग की है। 2011 में बने शौचालय का दरवाजा कभी खुला नहीं। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन जिलाध्यक्ष महेश चौड़ाकोटी का कहना है कि आम लोगों के अलावा पर्यटकों की भी यहां खूब आवाजाही होती है, लेकिन उन्हें सुविधा देने के लिए शौचालय तक यहां नहीं है।

निरुपयोगी हैं 4643 शौचालय

जिले में 49209 परिवारों में से अब तक 35676 में शौचालय बने हैं, लेकिन ढेरों शौचालयों में ताला लटका है। विभागीय आंकड़ों में ही करीब 4643 शौचालय बनने के बाद अब उपयोग में नहीं आ रहे हैं। गांवों से दूसरी जगह शिफ्ट होना, पानी की कमी और टूटने के बाद दोबारा नहीं बनाया जाना इसकी वजह है।


जिले को 2019 तक शौचालययुक्त बनाने का लक्ष्य है। पिछले साल 4000 के लक्ष्य के सापेक्ष 4044 शौचालय बनाए गए। बचे 13533 शौचालयों का निर्माण 2019 तक कर लिया जाएगा। -एमके गर्ग, परियोजना प्रबंधक, स्वजल, चंपावत।

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