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नियमों को ताख पर रख कर दिया चार शिक्षकों को भुगतान
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रिटायर्ड शिक्षक माधो सिंह अधिकारी।
- फोटो : CHAMPAWAT
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पुलहिंडोला जीआईसी में चार सेवानिवृत्त शिक्षकों को उपार्जित अवकाश (ईएल) का नियमों को ताख पर रख भुगतान कर दिया गया। इससे सरकारी कोष को 1.18 लाख रुपये से अधिक का चूना लगा है। मामला उजागर होने के बावजूद विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। इसी कॉलेज से रिटायर हुए शिक्षक माधो सिंह अधिकारी ने आरटीआई के जरिए इस पूरे मामले का खुलासा किया।
पुलहिंडोला इंटर कॉलेज 31 मार्च 2005 तक अशासकीय था। इस कॉलेज का एक अप्रैल 2005 को प्रांतीयकरण होने के बाद इसे राजकीय इंटर कॉलेज का दर्जा मिल गया। 2007 से 2009 के बीच रिटायर हुए यहां के चार शिक्षकों को अशासकीय सेवा अवधि (मार्च 2005 तक) के उपार्जित अवकाश का भी आर्थिक लाभ दे दिया गया। इन चारों शिक्षकों को कुल 144967 रुपये का भुगतान हुआ।
जबकि इन्हें बमुश्किल 16 हजार रुपये दिए जाने थे। इसी आधार पर पुलहिंडोला से रिटायर हुए शिक्षक माधो सिंह अधिकारी ने भी ईएल में अशासकीय सेवा के लाभ का आग्रह किया तो शिक्षा विभाग टालमटोल करता रहा। उन्होंने आरटीआई के जरिए पूरी जानकारी ली तो अशासकीय सेवा अवधि का आर्थिक लाभ मिलने का खुलासा हुआ।
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इस पूरे मामले में कोई कदम उठाने के बजाय तत्कालीन सीईओ डीएस राजूपत विभागीय अधिकारियों से मार्गदर्शन के लिए पत्राचार की रस्म अदायगी करते रहे। शिक्षक अधिकारी का कहना है कि वे इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं। अगर नियम है तो उन्हें भी अशासकीय अवधि का लाभ मिले अन्यथा जिन कार्मिकों ने गलत तरीके से इस प्रक्रिया को अंजाम दिया है उनसे वसूली की जाए। इधर इन चारों शिक्षकों का कहना है कि उनके स्तर से कोई भी गलती नहीं हुई है।
ये है नियम
नियमों के मुताबिक अशासकीय सेवा अवधि के उपार्जित अवकाश का लाभ नहीं दिया जा सकता है। वित्तीय हस्त पुस्तिका में स्पष्ट उल्लेख है कि उपार्जित अवकाश की धनराशि सिर्फ सरकारी शिक्षक-कार्मिक को ही अनुमन्य है।
अशासकीय सेवा अवधि का चार शिक्षकों को आर्थिक लाभ कैसे दिया गया, इस पूरे मामले की जांच की जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई के साथ वसूली की जाएगी। आरसी पुरोहित, मुख्य शिक्षाधिकारी।
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पुलहिंडोला इंटर कॉलेज 31 मार्च 2005 तक अशासकीय था। इस कॉलेज का एक अप्रैल 2005 को प्रांतीयकरण होने के बाद इसे राजकीय इंटर कॉलेज का दर्जा मिल गया। 2007 से 2009 के बीच रिटायर हुए यहां के चार शिक्षकों को अशासकीय सेवा अवधि (मार्च 2005 तक) के उपार्जित अवकाश का भी आर्थिक लाभ दे दिया गया। इन चारों शिक्षकों को कुल 144967 रुपये का भुगतान हुआ।
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जबकि इन्हें बमुश्किल 16 हजार रुपये दिए जाने थे। इसी आधार पर पुलहिंडोला से रिटायर हुए शिक्षक माधो सिंह अधिकारी ने भी ईएल में अशासकीय सेवा के लाभ का आग्रह किया तो शिक्षा विभाग टालमटोल करता रहा। उन्होंने आरटीआई के जरिए पूरी जानकारी ली तो अशासकीय सेवा अवधि का आर्थिक लाभ मिलने का खुलासा हुआ।
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इस पूरे मामले में कोई कदम उठाने के बजाय तत्कालीन सीईओ डीएस राजूपत विभागीय अधिकारियों से मार्गदर्शन के लिए पत्राचार की रस्म अदायगी करते रहे। शिक्षक अधिकारी का कहना है कि वे इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं। अगर नियम है तो उन्हें भी अशासकीय अवधि का लाभ मिले अन्यथा जिन कार्मिकों ने गलत तरीके से इस प्रक्रिया को अंजाम दिया है उनसे वसूली की जाए। इधर इन चारों शिक्षकों का कहना है कि उनके स्तर से कोई भी गलती नहीं हुई है।
ये है नियम
नियमों के मुताबिक अशासकीय सेवा अवधि के उपार्जित अवकाश का लाभ नहीं दिया जा सकता है। वित्तीय हस्त पुस्तिका में स्पष्ट उल्लेख है कि उपार्जित अवकाश की धनराशि सिर्फ सरकारी शिक्षक-कार्मिक को ही अनुमन्य है।
अशासकीय सेवा अवधि का चार शिक्षकों को आर्थिक लाभ कैसे दिया गया, इस पूरे मामले की जांच की जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई के साथ वसूली की जाएगी। आरसी पुरोहित, मुख्य शिक्षाधिकारी।