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बंद अस्पताल के बाहर पेट दर्द से कराहता रहा मरीज
अमर उजाला ब्यूरो रीठा साहिब/चंपावत।
Updated Tue, 23 May 2017 10:08 PM IST
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टांण के बंद अस्पताल में पेट दर्द से कराहता एक रोगी।
- फोटो : अमर उजाला
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35 साल का एक युवक पेट दर्द के इलाज को करीब पांच किलोमीटर पैदल चल टांण अस्पताल पहुंचा, मगर यहां लटके ताले ने उसकी तकलीफ दूर करने के बजाय और बढ़ा दी। तेज दर्द से कराहता मरीज बंद अस्पताल कक्ष के सामने लेट गया। बाद में कुछ लोगों की मदद से रीठा साहिब अस्पताल पहुंचाया गया।
परेवा गांव का विक्रम कुमार अपने ससुराल साल गांव गया था। जहां अचानक पेट दर्द की शिकायत होने पर वह गांव से करीब पांच किलोमीटर दूर टांण के राजकीय एलोपैथिक अस्पताल (एसएडी) पहुंचा, लेकिन अस्पताल में ताले लटकने से उसे इलाज नहीं मिल सका। तेज दर्द के चलते वह बेबस होकर बंद अस्पताल कक्ष के सामने लेट गया।
बाद में कुछ अन्य लोगों की मदद से विक्रम को करीब 20 किमी दूर रीठा साहिब अस्पताल ले जाया गया। जहां इलाज से उसे राहत मिली। बता दें कि जिला मुख्यालय से करीब 97 किलोमीटर दूर टांण के एसएडी में करीब एक साल से न डॉक्टर हैं और नहीं फार्मेसिस्ट।
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अस्पताल को खोलने-बंद करने के काम के लिए एक वार्डब्वाय है। जिला पंचायत सदस्य भोला सिंह, पैरा लीगल वालंटियर एचएस आर्या सहित इलाके के लोग अस्पताल की दुर्दशा को कई बार उठा चुके हैं, मगर अब तक यह अस्पताल इलाज लायक नहीं बन सका है। ग्रामीणों ने यहां तुरंत डॉक्टर एवं फार्मेसिस्ट की तैनाती की मांग की है।
वैक्सीन लगाने को दूसरे जिले की शरण
चंपावत। जिले के सरकारी अस्पताल अब इस लायक भी नहीं रह गए कि एक वैक्सीन लगा सकें। ये सवाल एक व्यक्ति की शिकायत से उभर रहा है। टनकपुर संयुक्त अस्पताल में ढाई महीने के एक शिशु को वैक्सीन देने के बाद भी वैक्सीन नहीं लगने का आरोप लगा है। इसे लेकर डीएम से लेकर सीएम तक ज्ञापन भेजा गया है।
वैश्य महासभा के अध्यक्ष इंद्र स्वरूप गुप्ता का कहना है कि ढाई महीने की पोती को रोटा वायरस, डीटीपी, एचईपी तथा बीएचआईवी के वैक्सीन लगवाने के लिए वे 19 मई को संयुक्त अस्पताल पहुंचे, मगर वैक्सीन देने के बाद भी किसी ने इसे नहीं लगाया।
अस्पताल प्रशासन के इनकार के बाद उन्होंने ऊधमसिंह नगर जिले के खटीमा के एक प्राइवेट अस्पताल में पोती को वैक्सीन लगाए। संयुक्त अस्पताल के रवैये से आहत होकर गुप्ता ने सीएम, स्वास्थ्य मंत्री, विधायक, डीएम, सीएमओ, सीएमएस को ज्ञापन भेजकर मामले की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है।
कोट---
अस्पताल में वैक्सीन न लगाने का मामला गंभीर है। प्रकरण की जांच करा न्यायसंगत कार्रवाई कराई जाएगी। साथ ही डॉक्टरविहीन टांण एसएडी में चिकित्सक भेजने के प्रयास किए जाएंगे।
-डाॅ. एमएस बोहरा, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।
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परेवा गांव का विक्रम कुमार अपने ससुराल साल गांव गया था। जहां अचानक पेट दर्द की शिकायत होने पर वह गांव से करीब पांच किलोमीटर दूर टांण के राजकीय एलोपैथिक अस्पताल (एसएडी) पहुंचा, लेकिन अस्पताल में ताले लटकने से उसे इलाज नहीं मिल सका। तेज दर्द के चलते वह बेबस होकर बंद अस्पताल कक्ष के सामने लेट गया।
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बाद में कुछ अन्य लोगों की मदद से विक्रम को करीब 20 किमी दूर रीठा साहिब अस्पताल ले जाया गया। जहां इलाज से उसे राहत मिली। बता दें कि जिला मुख्यालय से करीब 97 किलोमीटर दूर टांण के एसएडी में करीब एक साल से न डॉक्टर हैं और नहीं फार्मेसिस्ट।
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अस्पताल को खोलने-बंद करने के काम के लिए एक वार्डब्वाय है। जिला पंचायत सदस्य भोला सिंह, पैरा लीगल वालंटियर एचएस आर्या सहित इलाके के लोग अस्पताल की दुर्दशा को कई बार उठा चुके हैं, मगर अब तक यह अस्पताल इलाज लायक नहीं बन सका है। ग्रामीणों ने यहां तुरंत डॉक्टर एवं फार्मेसिस्ट की तैनाती की मांग की है।
वैक्सीन लगाने को दूसरे जिले की शरण
चंपावत। जिले के सरकारी अस्पताल अब इस लायक भी नहीं रह गए कि एक वैक्सीन लगा सकें। ये सवाल एक व्यक्ति की शिकायत से उभर रहा है। टनकपुर संयुक्त अस्पताल में ढाई महीने के एक शिशु को वैक्सीन देने के बाद भी वैक्सीन नहीं लगने का आरोप लगा है। इसे लेकर डीएम से लेकर सीएम तक ज्ञापन भेजा गया है।
वैश्य महासभा के अध्यक्ष इंद्र स्वरूप गुप्ता का कहना है कि ढाई महीने की पोती को रोटा वायरस, डीटीपी, एचईपी तथा बीएचआईवी के वैक्सीन लगवाने के लिए वे 19 मई को संयुक्त अस्पताल पहुंचे, मगर वैक्सीन देने के बाद भी किसी ने इसे नहीं लगाया।
अस्पताल प्रशासन के इनकार के बाद उन्होंने ऊधमसिंह नगर जिले के खटीमा के एक प्राइवेट अस्पताल में पोती को वैक्सीन लगाए। संयुक्त अस्पताल के रवैये से आहत होकर गुप्ता ने सीएम, स्वास्थ्य मंत्री, विधायक, डीएम, सीएमओ, सीएमएस को ज्ञापन भेजकर मामले की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है।
कोट---
अस्पताल में वैक्सीन न लगाने का मामला गंभीर है। प्रकरण की जांच करा न्यायसंगत कार्रवाई कराई जाएगी। साथ ही डॉक्टरविहीन टांण एसएडी में चिकित्सक भेजने के प्रयास किए जाएंगे।
-डाॅ. एमएस बोहरा, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।