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मानवीय मूल्यों के पतन पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट (चंपावत)
Updated Mon, 20 Mar 2017 10:53 PM IST
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लोहाघाट पीजी कॉलेज में आयोजित सेमीनार में मौजूद लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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पीजी कॉलेज में भारतीय शिक्षा पद्धति एवं मानवीय मूल्य विषय पर आयोजित दो दिनी सेमिनार संपन्न हो गया है। इस दौरान विभिन्न स्थानों महाविद्यालयों से आए वक्ताओं ने विचार रखते हुए शोध पत्र प्रस्तुत किए। प्राचार्य प्रो. केकेएस नेगी की अध्यक्षता में आयोजित तकनीकी सत्र में भारतीय शिक्षा व्यवस्था तथा मानवीय मूल्यों पर चर्चा की गई।
मुख्य अतिथि एलएन शर्मा ने कहा कि अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली स्वतंत्रता के बाद भी चलती रही जो कि स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी गलती थी। उनका कहना था कि शिक्षा के चार घाट हैं, आज के विद्यार्थी का उद्देश्य मात्र परीक्षा रूपी वैतरणी पार करना है। स्वामी नरसिंहानंद जी महाराज ने कहा कि किसी भी व्यवस्था में कमियां आना स्वाभाविक है, उन्होंने संवाद की अपेक्षा आचरण को शिक्षा के प्रसार में आवश्यक बताया। डा.बीडी दानी ने समाज शास्त्रीय दृष्टिकोण से मानवीय मूल्यों को परिभाषित किया। सेमीनार के संयोजक डॉ. धर्मेंद्र तिवारी का कहना था कि महाविद्यालय की ओर से आगामी वर्षों में भी सेमिनार का आयोजन किया जाएगा। संचालन डॉ. कमलेश सक्टा ने किया। आयोजन में डॉ. रूचिर जोशी, डॉ. महेश त्रिपाठी, डॉ. जगदीश जोशी, डॉ. तौफिक अहमद, डॉ. धर्मेंद्र राठौर, डॉ. रवि सनवाल ने सहयोग किया।
मुख्य अतिथि एलएन शर्मा ने कहा कि अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली स्वतंत्रता के बाद भी चलती रही जो कि स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी गलती थी। उनका कहना था कि शिक्षा के चार घाट हैं, आज के विद्यार्थी का उद्देश्य मात्र परीक्षा रूपी वैतरणी पार करना है। स्वामी नरसिंहानंद जी महाराज ने कहा कि किसी भी व्यवस्था में कमियां आना स्वाभाविक है, उन्होंने संवाद की अपेक्षा आचरण को शिक्षा के प्रसार में आवश्यक बताया। डा.बीडी दानी ने समाज शास्त्रीय दृष्टिकोण से मानवीय मूल्यों को परिभाषित किया। सेमीनार के संयोजक डॉ. धर्मेंद्र तिवारी का कहना था कि महाविद्यालय की ओर से आगामी वर्षों में भी सेमिनार का आयोजन किया जाएगा। संचालन डॉ. कमलेश सक्टा ने किया। आयोजन में डॉ. रूचिर जोशी, डॉ. महेश त्रिपाठी, डॉ. जगदीश जोशी, डॉ. तौफिक अहमद, डॉ. धर्मेंद्र राठौर, डॉ. रवि सनवाल ने सहयोग किया।
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