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जीएसटी के चलते नेपाल में हुई सामान की किल्लत
अमर उजाला ब्यूरो, बनबसा (चंपावत)।
Updated Sun, 13 Aug 2017 10:58 PM IST
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भारत में जीएसटी लागू होने के बाद से सीमावर्ती नेपाल में आम जरूरत की वस्तुओं की किल्लत होने लगी है। पूर्व में होने वाली सामान की खेप अब आधी रह गई है, जिससे उपभोक्ताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नेपाल कस्टम की आय पूर्व की अपेक्षा पचास प्रतिशत रह गई है।
जीएसटी बिल के बिना भारत से नेपाल को होने वाली सामान की सप्लाई पूर्व की अपेक्षा आधी रह गई है। नेपाली व्यापारियों के मुताबिक सीमावर्ती बनबसा, टनकपुर और खटीमा के अधिकांश व्यापारियों ने जीएसटी में पंजीकरण नहीं कराया है। इससे वह जीएसटी वाला बिल नहीं दे पा रहे हैं, जिस कारण नेपाली व्यवसायियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
नेपाल को प्रतिदिन साइकिलों और बाइकों पर होने वाली सामान की सप्लाई भी जीएसटी बिलों के अभाव में आधी रह गई है। बता दें कि जीएसटी से पहले बनबसा से करीब दो सौ साइकिलों और पचास से साठ बाइकों पर नेपाल को सामान की खेप पहुंचती थी। साइकिलों पर सामान ढोने वाले कैरियर बेरोजगार हो रहे हैं।
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नेपाल चैंबर ऑफ कामर्स के पूर्व अध्यक्ष हेमविक्रम थापा ने बताया कि घरेलू प्रयोग के लिए लाए जाने वाली पांच, दस किलो सामग्री के अलावा सभी बड़ी खेप बिना जीएसटी बिलों के नेपाल को नहीं भेज रहे हैं। इसके चलते नेपाल में सामान की किल्लत होने लगी है।
कस्टम अधीक्षक राजकुमार ने बताया कि बिना जीएसटी बिलों के अब नेपाल को सामान की सप्लाई पहले की तरह कर पाना संभव नहीं है। भारत से नेपाल को भेजे जाने वाले सामान पर व्यापारियों को इंटेग्रेटेड (आई) जीएसटी देनी होगी।
नेपाल भंसार कार्यालय (नेपाल कस्टम विभाग) के अधिकृत विकास कुमार के मुताबिक भारत की नई कर प्रणाली के कारण नेपाल को प्रतिदिन होने वाली आय भी घटकर आधी रह गई है। जीएसटी लागू होने से पूर्व नेपाल भंसार की आय प्रतिदिन 6 लाख रुपये के लगभग हो जाती थी, जो अब मुश्किल से प्रतिदिन 3 लाख रुपये ही रह गई है।
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जीएसटी बिल के बिना भारत से नेपाल को होने वाली सामान की सप्लाई पूर्व की अपेक्षा आधी रह गई है। नेपाली व्यापारियों के मुताबिक सीमावर्ती बनबसा, टनकपुर और खटीमा के अधिकांश व्यापारियों ने जीएसटी में पंजीकरण नहीं कराया है। इससे वह जीएसटी वाला बिल नहीं दे पा रहे हैं, जिस कारण नेपाली व्यवसायियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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नेपाल को प्रतिदिन साइकिलों और बाइकों पर होने वाली सामान की सप्लाई भी जीएसटी बिलों के अभाव में आधी रह गई है। बता दें कि जीएसटी से पहले बनबसा से करीब दो सौ साइकिलों और पचास से साठ बाइकों पर नेपाल को सामान की खेप पहुंचती थी। साइकिलों पर सामान ढोने वाले कैरियर बेरोजगार हो रहे हैं।
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नेपाल चैंबर ऑफ कामर्स के पूर्व अध्यक्ष हेमविक्रम थापा ने बताया कि घरेलू प्रयोग के लिए लाए जाने वाली पांच, दस किलो सामग्री के अलावा सभी बड़ी खेप बिना जीएसटी बिलों के नेपाल को नहीं भेज रहे हैं। इसके चलते नेपाल में सामान की किल्लत होने लगी है।
कस्टम अधीक्षक राजकुमार ने बताया कि बिना जीएसटी बिलों के अब नेपाल को सामान की सप्लाई पहले की तरह कर पाना संभव नहीं है। भारत से नेपाल को भेजे जाने वाले सामान पर व्यापारियों को इंटेग्रेटेड (आई) जीएसटी देनी होगी।
नेपाल भंसार कार्यालय (नेपाल कस्टम विभाग) के अधिकृत विकास कुमार के मुताबिक भारत की नई कर प्रणाली के कारण नेपाल को प्रतिदिन होने वाली आय भी घटकर आधी रह गई है। जीएसटी लागू होने से पूर्व नेपाल भंसार की आय प्रतिदिन 6 लाख रुपये के लगभग हो जाती थी, जो अब मुश्किल से प्रतिदिन 3 लाख रुपये ही रह गई है।