{"_id":"332581a4b90d1cb9095a8116218e047e","slug":"malta-producers-did-not-get-the-declared-price-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"माल्टा उत्पादकों को नहीं मिली घोषित कीमत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
माल्टा उत्पादकों को नहीं मिली घोषित कीमत
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट
Updated Mon, 04 Jan 2016 10:28 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीएम हरीश रावत सूबे के लोगों का रुझान खेतों की ओर कर गांवों से पलायन रोकने के भले ही जितने दावे करें, लेकिन सरकारी मशीनरी इसके लिए तैयार नहीं दिखती। हाल ही में किसानों को माल्टा तथा नींबू वर्गीय फलों की 20 रुपये प्रति किलो की दर से कीमतें मिलने की घोषणा फलोत्पादकों के लिए सपना साबित हो रही है।
विज्ञापन
शासन ने उद्यान विभाग को नींबू प्रजाति के फलों की खरीद कर किसानों को उसका वाजिब मूल्य दिलाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। लेकिन सरकारी खरीद केंद्रों के समय से न खुलने तथा इसकी जानकारी न होने के कारण यहां के काश्तकार माल्टा पांच से आठ रुपये प्रति किलो की दर से बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
विज्ञापन
निजी तौर पर अभी तक यहां से 50 से अधिक ट्रक माल्टा मैदानी क्षेत्रों की ओर जा चुका है। सवाल यह उठता है कि किसानों को फायदा दिलाने में आखिर चूक किस स्तर पर हुई है। इसके लिए उत्तरदायी कौन है। विभाग की कार्यप्रणाली इसी से जाहिर है कि अब तक जिले में सरकारी केंद्रों से मात्र आठ क्विंटल माल्टा की खरीद की गई है।
विज्ञापन