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प्रदूषण की जद में लोहाघाट की लोहावती नदी
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट
Updated Sun, 03 Jan 2016 10:08 PM IST
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ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम के तहत अब गांवों में पहले जैसी गंदगी नहीं रही। घर-घर में स्वजल द्वारा शौचालयों का निर्माण कराए जाने से लोगों को गंदगी से निजात मिलने के साथ रोजमर्रा के जीवन में सुविधा भी हुई है। इस योजना का कई गांवों द्वारा पूरा लाभ उठाए जाने से उन्हें निर्मल गांव की श्रेणी में शामिल कर वह पुरस्कार भी पा चुके हैं, लेकिन लोहाघाट की लोहावती नदी के हाल दिन-ब-दिन बिगड़ रहे हैं। इस नदी का पानी पीने लायक तो दूर, नहाने के लिए भी इस्तेमाल करने से लोग कतरा रहे हैं।
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अनियोजित तरीके से विकसित हो रहे लोहाघाट नगर में बढ़ रही आबादी से लोहावती नदी में गंदगी बढ़ गई है। यही नहीं नगर क्षेत्र में कई लोगों द्वारा शौचालयों का निकास सीधे नाली में किए जाने से लोहावती नदी का जल प्रदूषित हो गया है। लोहाघाट नगर व्यापारिक और शैक्षिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसे लेकर यहां लोग अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए बस रहे हैं, लेकिन जिस तेजी से यहां की आबादी बढ़ रही है, सीवर लाइन का निर्माण नहीं हो पा रहा है, जबकि इसके लिए लोग लंबे समय से मांग करते आ रहे हैं। पर्यावरणविद् गणेश पुनेठा का कहना है कि लोहावती नदी का जल अब बेहद प्रदूषित हो गया है।
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लोहावती नदी से गायब हो रही मछलियां
कभी कोल्ड वाटर की गोल्डन ट्राउट (सुनहरी महाशीर) की यह नदी ऐशगाह हुआ करती थी, लेकिन अब नदी का जल इतना प्रदूषित हो गया है कि पिछले एक दशक से मछली तो दूर, मेढ़क तक नहीं दिखाई दे रहे हैं। नदी से करीब 20 किमी के दायरे में जैव श्रृंखला ही नष्ट हो चुकी है। नतीजतन यह पवित्र नदी आज गंदे नाले की शक्ल ले चुकी है।
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सीवर लाइन के लिए पानी की कमी
नगर में सीवर लाइन तब तक कामयाब नहीं हो सकती है, जब तक कि उसके लिए पर्याप्त पानी की व्यवस्था नहीं की जाती है। जल निगम द्वारा इस काम के लिए सर्वेक्षण भी किया गया, जिसमें पाया गया कि नगर के लोगाें को वर्तमान में पीने के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में सीवर को प्रेशर से बहाने के लिए पानी की पर्याप्त आवश्यकता होगी, जिसके कारण यह योजना कार्यरूप नहीं ले पा रही है।