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बुनियादी सुविधाओं के अभाव में छोड़ा गांव
ब्यूरो/अमर उजाला,लोहाघाट
Updated Sat, 20 Feb 2016 10:27 PM IST
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प्रकृति ने बेतलाड़ गांव को अपार नैसर्गिक सौंदर्य दिया है, लेकिन बुनियादी जरूरतों की कमी यहां के लोगों को अपना गांव छोड़ने पर मजबूर कर रही है। 15 परिवारों के इस गांव में बुनियादी सुविधाओं के अभाव के चलते तीन परिवार यहां से चोरगलिया जाकर बस चुके हैं, जबकि शेष लोगों को यहां की सोना उगलने वाली भूमि का मोह बांधे हैं।
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बेतलाड़ पहुंचने के लिए टांण से 18 किमी और सूखीढांग से 35 किमी की पैदल दुर्गम यात्रा तय की जाती है। राज्य स्थापना के कुछ समय बाद यहां एक अंग्रेज साध्वी सांई माता आई, जो यहां के प्राकृतिक सौंदर्य से अभिभूत रही और तीन वर्ष तक उनका आना-जाना रहा। उन्होंने गांव के सभी परिवारों के लिए सोलर लाइट, शौचालय, पेयजल की व्यवस्थाएं करवाई। उरेडा विभाग की ओर से ग्रामीणों को सब्सिडी में सोलर लैंप दिए थे, अब अधिकांश लोगों के लैंप खराब हो चुके हैं। यहां के लोग साल भर के लिए खाद्यान्न पैदा कर लेते हैं। दूध, घी भी यहां खूब होता है, लेकिन यातायात के साधन न होने के कारण इनका कोई व्यापारिक लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पाता है।
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बेतलाड़ के लोगों ने अब तक किसी नेता को नहीं देखा है। यहां तक कि चुनाव के दौरान भी कोई नेता इतनी पैदल दूरी तय कर यहां पहुंचने का जोखिम नहीं उठाते हैं। गांव में प्राथमिक विद्यालय है, जूनियर एवं इंटरमीडिएट की शिक्षा लेने के लिए के यहां के बच्चों को कठौती गांव जाना पड़ता है, जहां पुल की सुविधा न होने से बरसात में वह स्कूल नहीं जा पाते हैं।
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गांव में ईको पर्यटन की अपार संभावनाएं
गांव का एक मात्र छात्र नीरज बिनवाल राजकीय पीजी कॉलेज में बीकॉम तृतीय वर्ष का छात्र है। इससे पहले गांव का कोई भी युवक नियमित पढ़ाई नहीं कर पाया। नीरज का कहना है कि इस क्षेत्र को सड़क और विद्युत की सुविधा देने से यहां पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। इस गांव में ईको पर्यटन की भी अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बुनियादी सुविधाओं के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत का इस ओर ध्यान आकर्षित किया है।