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लाइन बिछने के बाद भी नहीं मिली बिजली
Updated Sun, 28 Aug 2016 09:23 PM IST
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लाइन बिछने के बाद भी नहीं मिली बिजली
- फोटो : अमर उजाला
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नेपाल सीमा के पास के तल्लादेश के मटकांडा, मोस्टा, बकोड़ा, सौराई गांवों के लोगों की रात अब भी अंधियारी है। करीब एक दशक पहले बिजली की लाइन बिछने के बावजूद इन गांवों में बिजली का उजाला नहीं हुआ है।
तल्लादेश से लगे इन चार गांवों के दो हजार से अधिक लोगों को बिजली नहीं होने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। यहां के स्कूलों में कंप्यूटर की पढ़ाई नहीं हो पाती है। वहीं गांव के लोग टेलीविजन तक से अनभिज्ञ हैं। सरपंच गिरधर महर, पूर्व प्रधान रूप सिंह, शेर सिंह महर, बची सिंह दीवान सिंह सहित कई ग्रामीणों का कहना है कि बिजली नहीं होने से बच्चों के भविष्य पर असर पड़ रहा है। रात को केरोसिन के लैंप में पढ़ने से बच्चों की आंखों पर असर पड़ता है।
बिजली नहीं होने का असर इलाके के विकास पर भी पड़ रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश चंद्र भट्ट का कहना है कि करीब 11 साल पहले बिजली की लाइन बिछने, ट्रांसफार्मर लगने के बावजूद गांवों में उजाला नहीं होना, इलाके के साथ नाइंसाफी है। इस मामले को विद्युत नियामक आयोग ले जाने की बात कही गई है।
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इन गांवों में पहले लगे बिजली के पोल, तार और ट्रांसफार्मर में से ज्यादातर खराब हो चुके हैं। कुछ आपदा की भेंट चढ़ गए थे। इन इलाकों के विद्युतीकृत किए जाने के लिए काम चल रहा है और जल्द ही कार्य पूरा कर लिया जाएगा तथा कनेक्शन देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। -आरसी पंत जूनियर इंजीनियर, यूपीसीएल, चंपावत।
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तल्लादेश से लगे इन चार गांवों के दो हजार से अधिक लोगों को बिजली नहीं होने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। यहां के स्कूलों में कंप्यूटर की पढ़ाई नहीं हो पाती है। वहीं गांव के लोग टेलीविजन तक से अनभिज्ञ हैं। सरपंच गिरधर महर, पूर्व प्रधान रूप सिंह, शेर सिंह महर, बची सिंह दीवान सिंह सहित कई ग्रामीणों का कहना है कि बिजली नहीं होने से बच्चों के भविष्य पर असर पड़ रहा है। रात को केरोसिन के लैंप में पढ़ने से बच्चों की आंखों पर असर पड़ता है।
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बिजली नहीं होने का असर इलाके के विकास पर भी पड़ रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश चंद्र भट्ट का कहना है कि करीब 11 साल पहले बिजली की लाइन बिछने, ट्रांसफार्मर लगने के बावजूद गांवों में उजाला नहीं होना, इलाके के साथ नाइंसाफी है। इस मामले को विद्युत नियामक आयोग ले जाने की बात कही गई है।
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इन गांवों में पहले लगे बिजली के पोल, तार और ट्रांसफार्मर में से ज्यादातर खराब हो चुके हैं। कुछ आपदा की भेंट चढ़ गए थे। इन इलाकों के विद्युतीकृत किए जाने के लिए काम चल रहा है और जल्द ही कार्य पूरा कर लिया जाएगा तथा कनेक्शन देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। -आरसी पंत जूनियर इंजीनियर, यूपीसीएल, चंपावत।