{"_id":"58f8fa5f4f1c1ba34647387c","slug":"lack-of-water-in-water-source","type":"story","status":"publish","title_hn":"पेयजल स्रोत में आई 60 प्रतिशत की कमी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पेयजल स्रोत में आई 60 प्रतिशत की कमी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Thu, 20 Apr 2017 11:43 PM IST
विज्ञापन
जल स्रोत में पानी की कमी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंपावत। शहर में पेयजल संकट गहराने लगा है। अप्रैल में ही 10 प्रतिशत कमी हो गई है जबकि मार्च में स्रोत से आधा पानी मिल रहा था। इन हालातों से विभाग भी चिंतित है। यही हाल रहा तो प्रचंड गर्मी में लोगों को पेयजल की जबर्दस्त किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।
विज्ञापन
चंपावत में 1.10 मिलियन लीटर डेली (एमएलडी) पानी की जरूरत है, मगर इसके सापेक्ष महज 0.24 एमएलडी ही मिल रहा है। जल संस्थान के जेई एसएस थापा ने बताया कि रौखेत समेत तमाम पेयजल स्रोतों में करीब 40 प्रतिशत पानी मिल रहा है। चंपावत में 73 पेयजल योजनाएं हैं।
विज्ञापन
रौखेत स्रोत से तीन पेयजल योजनाएं बनाई गई हैं, जो जिला मुख्यालय की तल्ली मांदली, मल्ली मांदली, देवल, मांजगांव, त्यारकूड़ा, जीआईसी रोड, कनलगांव, जीजीआईसी क्षेत्र के लोगों की प्यास बुझाती है लेकिन इस वक्त रौखेत स्रोत के पानी को 112.5 किली के तीन टैंकरों में एकत्र किया जाता है।
विज्ञापन
जाड़ों में इस स्रोत से ये तीनों टैंकर ओवरफ्लो हो जाते हैं, लेकिन इस वक्त ये टैंक एक दिन में एक-तिहाई भी नहीं भर पा रहे हैं। रौखेत निवासी जोहारी राम का कहना है कि गर्मी की शुरुआत में हो रही पानी की कमी भविष्य के लिए खतरनाक संकेत हैं।
जिला मुख्यालय में पेयजल के नजरिए से कनलगांव, जीआईसी रोड, गोरलचौड़ रोड, भैरवा, तल्लीहाट, मल्लीहाट, तल्ली मादली संवेदनशील क्षेत्र हैं। जेई एसएस थापा ने बताया कि पेयजल संकट से निपटने को इन इलाकों में तीन हजार लीटर क्षमता के दो विभागीय टैंकर और किराए के तीन वाहनों के जरिए पानी बांटा जा रहा है।