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चंपावत जिले में कीवी के खरीदार नहीं

Sun, 03 Jan 2016 10:04 PM IST
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत Updated Sun, 03 Jan 2016 10:04 PM IST
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Kiwi in Champawat district takers

कीवी का जो फल दिल्ली और दूसरी जगहों में 500 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बमुश्किल मिलता है, उसे यहां लोग 100 रुपये के हिसाब से भी खरीदने को तैयार नहीं। कीवी का स्वाद भले ही चंपावत के लोगों के लिए नया हो, मगर इससे वे अनजान नहीं है। चंपावत में पिछले साल से कीवी का उत्पादन हो रहा है, मगर यहां के लोग इसे अब जान रहे हैं। फिर भी इस फल के खरीदार नहीं मिल रहे हैं। स्वाद और खूबियों से वाकिफ नहीं होने के चलते मटमेले रंग के इस फल की मार्केटिंग नहीं हो पा रही है।

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यहां से 13 किलोमीटर दूर बनलेख के युवा प्रगतिशील किसान धर्मेंद्र कुमार को 2011 में कीवी फल की पहली बार जानकारी मिली। अल्मोड़ा के विवेकानंद कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों से मिलकर उनकी दिलचस्पी जागी। इस संस्थान ने ही कीवी लगाने के लिए उन्हें प्रेरित किया। धर्मेंद्र ने 75 रुपये में पांच पौधे (एक मेल और चार फीमेल) खरीदे। मेल पौधे में सिर्फ फूल आते हैं, जबकि फीमेल पौधे फल देते हैं। इन पौधों से 2014 में पहली बार फल आया। करीब 150 किलोग्राम कीवी फल पैदा हुई, लेकिन न खरीदार मिला और नहीं कोई बाजार। ज्यादातर फल बर्बाद हुआ।
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इस साल इसका उत्पादन और बढ़ा। करीब ढाई क्विंटल कीवी फल का उत्पादन हुआ, जिसमें से एक क्विंटल करीब हल्द्वानी बिक्री को भेजा। बाकी पेड़ में है। टूटने के बाद कीवी एक सप्ताह तक ही सुरक्षित रह पाता है।
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धर्मेंद्र ने नहीं हारी हिम्मत
कीवी के पौधों से फल उगाने वाले धर्मेंद्र कुमार को बाजार तो अब भी नहीं मिल रहा है, न कहीं से कोई खास सहयोग। अलबत्ता उन्होंने हौसला नहीं खोया है। धर्मेंद्र का कहना है कि महानगरों में इसकी मांग भी है और 200 से 300 रुपये किग्रा तक इसकी कीमत मिलती है, लेकिन इसे सुरक्षित भेजने में दिक्कत आती है। हल्द्वानी में करीब एक क्विंटल कीवी 200 रुपये किग्रा के हिसाब से बिकी। वहीं चंपावत में कीवी को 100 रुपये की कीमत भी नहीं मिल रही है।

कीवी के फल प्रचलित फलों में नहीं है। अलबत्ता बनलेख के अलावा इक्का-दुक्का जगहों पर इसकी निजी स्तर पर पहल हुई थी। इस फल की खूबियों और फायदों से लोग वाकिफ नहीं है। इसलिए बाजार का संकट है। उद्यान विभाग फिलहाल कीवी की मार्केटिंग नहीं कर रहा है। -एचसी तिवारी, जिला उद्यान अधिकारी, चंपावत।


डेंगू की अचूक दवा है कीवी

कीवी का रंग मटमेला और आलू से मिलता-जुलता है। यह फल सेहतमंद होने के साथ ही कई रोगों से बचाव में भी लाभदायक है। डॉक्टरों का कहना है कि कीवी में विटामिन सी, प्रोटीन और फाइबर जैसे गुणों की वजह से यह एंटीआक्सिडेंट से युक्त है। प्लेटलेटस बढ़ाने की क्षमता होने की वजह से यह डेंगू रोग में बेहद फायदेमंद है।

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