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बंद दुकान के एक कमरे में चल रहा आईटीआई
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत।
Updated Sun, 18 Sep 2016 10:28 PM IST
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भिंगराड़ा आईटीआई का भवन।
- फोटो : अमर उजाला
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चंपावत जिले मेें 12 साल में चार नए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) खुल गए, लेकिन इन नए तकनीकी संस्थानों की तस्वीर ठीक नहीं है। 2015 में खुले भिंगराड़ा आईटीआई किसी प्राइमरी स्कूल से भी बदतर है। सरकारी स्तर पर पढ़ाई के लिए जरूरी सामग्री तक नहीं है। बंद हो चुकी दुकान के एक कमरे में छात्र बैंच में बैठ पढ़ाई कर रहे हैं। यहां तीन ट्रेडों के बजाय एक ही ट्रेड चल रहा है।
पिछले साल लधिया घाटी के भिंगराड़ा में खुले आईटीआई में इलेक्ट्रिकल्स, कंप्यूटर ऑफ प्रोग्रामिंग एप्लीकेशन (कोपा) और फिटर के ट्रेड स्वीकृत हुए। मगर संस्थान में दो ट्रेड शुरू ही नहीं हो पा रहे हैं। एकमात्र इलेक्ट्रिकल्स इस वक्त चल रहा है। छात्रों को बैठने के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं है। बैठने के लिए फर्नीचर तक नहीं है।
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फिलहाल यहां बंद हो चुकी दुकान के स्वामी जगदीश भट्ट द्वारा दी गई बैंच में 15 बच्चे बैठ रहे हैं। ब्लैक बोर्ड की व्यवस्था भी ग्राम प्रधान धर्मानंद भट्ट ने की गई है। अनुदेशक हरीश चंद्र पांडेय का कहना है कि जगह की कमी से संचालन में दिक्कत हो रही है। छात्रों का कहना है कि जगह और दूसरे अन्य साधनों की कमी से उन्हें परेशानी झेलनी पड़ती है।
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भिंगराड़ा में जगह की कमी से फिलहाल दो ट्रेड शुरू नहीं हो पा रहे हैं। आईटीआई के भवन बनाने को ग्रामीणों द्वारा जमीन दी गई है। जल्द ही भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी। कायदे के प्रशिक्षण के लिए जरूरी व्यवस्था के प्रयास किए जा रहे हैं।
जेपी टम्टा, नोडल अधिकारी और प्रधानाचार्य, आईटीआई, टनकपुर।
चंपावत में 1984 में खुला आईटीआई जीआईसी तिराहे के पास किराए में चल रहा है। ट्रेड भी बस वायरमैन और कटिंग टेलरिंग के ही चल रहे हैं। 1989 में खेतीखान में स्थापित आईटीआई में पांच ट्रेड स्वीकृत हैं, लेकिन काफी समय से इलेक्ट्रानिक्स, इलेक्ट्रिकल्स और वायरमैन के ट्रेड ही चल रहे हैं। राज्य बनने के बाद खुले दिगालीचौड़ में दो (इलेक्ट्रानिक्स और फीटर), बाराकोट में दो (इलेक्ट्रानिक्स के अलावा कोपा), मंच गांव में इलेक्ट्रानिक्स और कोपा दो और भिंगराड़ा में एक ट्रेड चल रहे है। चंपावत आईटीआई का भवन निर्माणाधीन है।