{"_id":"58a48fad4f1c1b5f7ed865b3","slug":"infrastructure-suffering-amazing-faith-in-democracy","type":"story","status":"publish","title_hn":" बुनियादी सुविधा की पीड़ा, पर लोकतंत्र में गजब की आस्था","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बुनियादी सुविधा की पीड़ा, पर लोकतंत्र में गजब की आस्था
ब्यूरो/अमर उजाला, टनकपुर (चंपावत)
Updated Wed, 15 Feb 2017 10:58 PM IST
विज्ञापन
बुनियादी सुविधा की पीड़ा, पर लोकतंत्र में गजब की आस्था
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
तीन छोर से नेपाल सीमा से घिरे टनकपुर क्षेत्र के दुर्गम थपलियालखेड़ा गांव के लोगों में वोटिंग के लिए गजब का उत्साह दिखा। हालांकि शुरुआती पहले एक घंटे मेें सिर्फ दो मत पड़े, लेकिन बाद में वोट डालने मतदाता ऐसे उमड़े कि सुबह साढ़े ग्यारह बजे तक मतदान का प्रतिशत 54.95 तक पहुंच गया। बुनियादी सुविधाओं से वंचित इस गांव के मतदाताओं ने हर बार की तरह इस बार भी बुनियादी सुविधाओं की उम्मीद में उत्साह के साथ मताधिकार का प्रयोग किया है।
अमर उजाला की टीम मतदान के दिन सुबह नेपाल सीमा पर स्थित अतिसंवेदनशील थपलियालखेड़ा मतदान केंद्र पहुंची। 45 परिवार वाले इस गांव की कुल आबादी 220 है। वन भूमि में बसे इस गांव के लोग भारतीय भू-भाग के प्रहरी के रूप में रह तो रहे हैं, लेकिन बिजली, सड़क, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं से आज भी महरूम हैं। इसका असर मतदान के दिन भी दिखाई पड़ा।
वर्ष 2012 से पहले तक यहां के मतदाताओं को सीमा लांघकर वोट डालने सैलानीगोठ मतदान केंद्र में आना पड़ता था। अब उन्हें गांव में ही मतदान की सुविधा मुहैया है। वर्ष 2012 से वे दूसरे विधानसभा चुनाव में गांव के मतदान केंद्र में वोट डाल रहे हैं। टीनशेड में चल रहे राजकीय प्राथमिक विद्यालय में यहां का मतदान केंद्र था। नेपाल सीमा से लगा होने के कारण सुरक्षा के लिहाज से मतदान केंद्र को अतिसंवेदनशील श्रेणी में रखा गया था। इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी अर्द्धसैनिक बल को सौंपी गई थी।
विज्ञापन
गांव की मतदाता संख्या 111 है, इनमें से 29 मतदाता रोजगार के लिए बाहर गए हैं। गांव के समाजसेवी गोविंद सिंह के मुताबिक इस बार वोटिंग के लिए गांव में 82 मतदाता मौजूद हैं, इनमें से ही 80 मतदाताओं ने वोट डाले हैं।
अमर उजाला की टीम मतदान के दिन सुबह नेपाल सीमा पर स्थित अतिसंवेदनशील थपलियालखेड़ा मतदान केंद्र पहुंची। 45 परिवार वाले इस गांव की कुल आबादी 220 है। वन भूमि में बसे इस गांव के लोग भारतीय भू-भाग के प्रहरी के रूप में रह तो रहे हैं, लेकिन बिजली, सड़क, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं से आज भी महरूम हैं। इसका असर मतदान के दिन भी दिखाई पड़ा।
विज्ञापन
वर्ष 2012 से पहले तक यहां के मतदाताओं को सीमा लांघकर वोट डालने सैलानीगोठ मतदान केंद्र में आना पड़ता था। अब उन्हें गांव में ही मतदान की सुविधा मुहैया है। वर्ष 2012 से वे दूसरे विधानसभा चुनाव में गांव के मतदान केंद्र में वोट डाल रहे हैं। टीनशेड में चल रहे राजकीय प्राथमिक विद्यालय में यहां का मतदान केंद्र था। नेपाल सीमा से लगा होने के कारण सुरक्षा के लिहाज से मतदान केंद्र को अतिसंवेदनशील श्रेणी में रखा गया था। इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी अर्द्धसैनिक बल को सौंपी गई थी।
विज्ञापन
गांव की मतदाता संख्या 111 है, इनमें से 29 मतदाता रोजगार के लिए बाहर गए हैं। गांव के समाजसेवी गोविंद सिंह के मुताबिक इस बार वोटिंग के लिए गांव में 82 मतदाता मौजूद हैं, इनमें से ही 80 मतदाताओं ने वोट डाले हैं।