लोहाघाट (चंपावत)। नगर से लगे रायनगर चौड़ी गांव में छलड़ी की होली की रात को बैठकी होली का आयोजन किया गया। जिसमें देर रात तक होल्यार होली गीतों में झूमते रहे। होल्यारों ने राग काफी, जंगला काफी, सहाना, मालकोष, जैजैवंती आदि रागों में एक से बढ़कर एक होली गीतों की झड़ी लगा दी। होली के रंग में सराबोर श्रोता भी देर रात तक थिरकते रहे।
गांव के देवालय में शनिवार रात प्रसिद्ध रंग कर्मी और वरिष्ठ होल्यार भैरव दत्त राय (सेठजी) ने होली आज जले चाहे काल जले, सबके कंथ लौटि घर आए, हमरे पिया परदेश चले होली गीत से शुरुआत की। उन्होंने मेरे महबूब आ जा, लगा ले गले, जिंदगानी का कोई ठिकाना नहीं, कल खुदा जाने ये दिन रहे न रहे, नौजवानी का कोई भरोसा नहीं गीत की शानदार प्रस्तुति पर श्रोता झूमने लगे। पूर्व बीडीसी सदस्य भैरव राय ने वन में कोयल बोले, जिया मोरे डोले, घर आजा बलम घर आ, नीरज राय ने होली खेलत हैं गिरधारी, मुरली चंद बजत ढप न्यारी संग युवती बृजनारी, रमेश चंद्र राय ने मोतियन की लड़ तोड़ी, बंय्या न मरोड़ी और मैं तो कोसों की कुंजबिहारी सखा, मोरी नई चुनरिया फारी, अरुन राय ने होली के दिन होली आई रे, जरा बाजे बांसुरी बाजे, विकास कापड़ी ने होली खेलूंगी उन्हीं के संग, जाके घुघराले बाल, सांवला हो रंग, निखिल राय ने कैसी बंसरी बजाई तोरे कान्हा ने ललक गीत की शानदार प्रस्तुति दी। देर रात तक चली होली महफिल में ढोलक में ताल मनोज राय, सुनील राय ने ठोकी। होल्यार नीरज राय, बिट्टू कापड़ी, विवेक राय, गिरीश, संजय राय, महेश राय, निखिल, अर्जुन, विकास ने सुर में सुर मिलाया।