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किसानों पर बढ़ रहा ब्याज, बैंकों की वसूली भी लटकी
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत
Updated Wed, 21 Dec 2016 10:24 PM IST
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नोटबंदी की मार खेती और पशुपालन के लिए कर्ज लेने वाले किसानों पर भी पड़ रही है। वह समय पर किस्त अदा नहीं कर पा रहे हैं, इससे उन पर ब्याज बढ़ रहा है। वहीं, बैंकों की वसूली पर भी इसका असर पड़ रहा है।
किसान लीलाधर, रामदत्त, नारायण दत्त, जयदत्त, मोहन सिंह, नारायण सिंह महर, नेत्र बल्लभ तिवारी, कैलाश चंद्र, ईश्वरीदत्त ने इस साल के शुरू में 15 हजार से 70 हजार रुपए तक का कर्ज लिया। हालांकि, कर्ज लेने वालों की ये फेहरिस्त काफी बड़ी है। जिला सहायक निबंधक पान सिंह राणा ने बताया कि चंपावत जिले की 23 साधन सहकारी समितियों के 28508 सदस्यों मेें 4678 किसानों ने 30.41 करोड़ रुपए कर्ज लिया है। पिथौरागढ़ जिला सहकारी बैंक की आठ शाखाओं ने इन किसानों को कर्ज दिया पर इन बैंकों को नवंबर के पहले सप्ताह बाद वसूली में परेशानी आ रही है। डीसीबी की स्थानीय शाखा के प्रबंधक गजेंद्र राणा का कहना है कि कर्ज की वसूली एकदम कम हो गई है।
भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशों के चलते जिला सहकारी बैंकों को पुराने नोटों को स्वीकारने की इजाजत नहीं थी। इस मनाही का खामियाजा बैंकों के साथ कर्ज लेने वाले किसानों को भुगतना पड़ा। किसानों का कहना है कि पुराने नोट नहीं स्वीकारने और नए नोटों की उपलब्धता नहीं होने से वे कर्ज की किस्त चुकाने की स्थिति में नहीं है। इसके चलते किसानों को इस अवधि का भी ब्याज देना होगा। खरीफ की फसल बेचने के बाद किसान आमतौर पर कर्ज की वापसी करते हैं, लेकिन बदले हालत से उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है।
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एक महीने में कम हुई 194.83 लाख की वसूली
जिले में 8 नवंबर के बाद से कर्ज की वसूली पर जबर्दस्त असर पड़ा है। पिछले साल के नवंबर के सापेक्ष इस बार 194.83 लाख रुपए कम वसूली हुई है। 3041.43 लाख रुपए के कर्ज के सापेक्ष अक्तूबर तक 227.17 लाख रुपए की वसूली हुई थी। नवंबर में महज 61.6 लाख रुपए वसूल हुए। इसकी तुलना में 2409.72 लाख रुपए के कर्ज के सापेक्ष अक्तूबर 2015 तक 108.23 लाख रुपए की वसूली हुई, जबकि पिछले साल नवंबर में 256.43 लाख रुपए की वसूली हुई थी।
किसानों के कर्ज माफी या वसूली स्थगित करने का कोई आदेश नहीं है। अलबत्ता सहकारी बैंकों में पुराने नोटों को स्वीकार नहीं करने से कर्ज वसूली प्रभावित जरूर हुई है। -डा.अहमद इकबाल, जिलाधिकारी, चंपावत।
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किसान लीलाधर, रामदत्त, नारायण दत्त, जयदत्त, मोहन सिंह, नारायण सिंह महर, नेत्र बल्लभ तिवारी, कैलाश चंद्र, ईश्वरीदत्त ने इस साल के शुरू में 15 हजार से 70 हजार रुपए तक का कर्ज लिया। हालांकि, कर्ज लेने वालों की ये फेहरिस्त काफी बड़ी है। जिला सहायक निबंधक पान सिंह राणा ने बताया कि चंपावत जिले की 23 साधन सहकारी समितियों के 28508 सदस्यों मेें 4678 किसानों ने 30.41 करोड़ रुपए कर्ज लिया है। पिथौरागढ़ जिला सहकारी बैंक की आठ शाखाओं ने इन किसानों को कर्ज दिया पर इन बैंकों को नवंबर के पहले सप्ताह बाद वसूली में परेशानी आ रही है। डीसीबी की स्थानीय शाखा के प्रबंधक गजेंद्र राणा का कहना है कि कर्ज की वसूली एकदम कम हो गई है।
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भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशों के चलते जिला सहकारी बैंकों को पुराने नोटों को स्वीकारने की इजाजत नहीं थी। इस मनाही का खामियाजा बैंकों के साथ कर्ज लेने वाले किसानों को भुगतना पड़ा। किसानों का कहना है कि पुराने नोट नहीं स्वीकारने और नए नोटों की उपलब्धता नहीं होने से वे कर्ज की किस्त चुकाने की स्थिति में नहीं है। इसके चलते किसानों को इस अवधि का भी ब्याज देना होगा। खरीफ की फसल बेचने के बाद किसान आमतौर पर कर्ज की वापसी करते हैं, लेकिन बदले हालत से उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है।
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एक महीने में कम हुई 194.83 लाख की वसूली
जिले में 8 नवंबर के बाद से कर्ज की वसूली पर जबर्दस्त असर पड़ा है। पिछले साल के नवंबर के सापेक्ष इस बार 194.83 लाख रुपए कम वसूली हुई है। 3041.43 लाख रुपए के कर्ज के सापेक्ष अक्तूबर तक 227.17 लाख रुपए की वसूली हुई थी। नवंबर में महज 61.6 लाख रुपए वसूल हुए। इसकी तुलना में 2409.72 लाख रुपए के कर्ज के सापेक्ष अक्तूबर 2015 तक 108.23 लाख रुपए की वसूली हुई, जबकि पिछले साल नवंबर में 256.43 लाख रुपए की वसूली हुई थी।
किसानों के कर्ज माफी या वसूली स्थगित करने का कोई आदेश नहीं है। अलबत्ता सहकारी बैंकों में पुराने नोटों को स्वीकार नहीं करने से कर्ज वसूली प्रभावित जरूर हुई है। -डा.अहमद इकबाल, जिलाधिकारी, चंपावत।