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कोलीढेक में प्रस्तावित झील का निर्माण ठंडे बस्ते में
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट
Updated Thu, 12 Nov 2015 10:04 PM IST
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लोहावती नदी में प्रस्तावित कोलीढेक बहुउद्देश्यीय झील को लेकर यहां की तस्वीर बदलने का ख्वाब जमीनी हकीकत नहीं बन पा रहा है, हालांकि झील की प्रत्याशा में कोलीढेक गांव में लोगों ने पर्यटकों के स्वागत के लिए आलीशान घर और होटल बनवाए।
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तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने वर्ष 2009 में झील की स्वीकृति दी थी। उसके बाद बीसी खंडूरी ने भी स्थल का निरीक्षण कर झील के प्रस्ताव को हरी झंडी दी थी। इस प्रोजेक्ट की महत्ता को देखते हुए राष्ट्रीय सम विकास योजना से 2.76 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई। इसके बाद करीब 38 लाख रुपये झील के सर्वेक्षण कार्य में खर्च हुए। यह प्रोजेक्ट सिंचाई विभाग से पर्यटन विभाग को दिया गया।
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17.36 करोड़ रुपये की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) शासन को भेजी गई, लेकिन जिसकी स्वीकृति न मिलने से भारी भरकम राशि शासन को लौटा दी गई जबकि झील बनने से क्षेत्र में पर्यटन विकास समेत पेयजल, सिंचाई सुविधा देना प्रस्तावित किया गया था। इस अवधि में इस झील का स्वरूप बदलकर इसके पानी को केवल सिंचाई कार्य में प्रयोग में लाने के लिए त्वरित सिंचाई लाभ योजना के तहत 14 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। जिसे भी अस्वीकृत कर दिया गया।
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झील के निर्माण में लगेगी 6.241 हेक्टेयर भूमि
कोलीढेक में प्रस्तावित झील की लंबाई डेढ़ किमी से अधिक, चौड़ाई सौ से डेढ़ सौ मीटर, गहराई 20 मीटर की है। जिसकी जलभंडारण क्षमता 6.66 लाख क्यूसेक होगी। झील बनने से 6.241 हेक्टेयर वन भूमि डूब क्षेत्र में आएगी। भूमि स्वामियों ने पहले ही अपनी भूमि सिंचाई विभाग को देने की सहमति दी जा चुकी है।
चलाया जा चुका लंबा आंदोलन
झील के निर्माण को लेकर कोलीढेक गांव के लोगों ने कैप्टन मोहन सिंह ढेक के नेतृत्व में लंबा आंदोलन चलाया गया। जिसे मुख्यमंत्री हरीश रावत के आश्वासन पर स्थगित तो किया गया, लेकिन इस कार्य में कोई प्रगति नहीं हुई।
सांसद, विधायक भी झील के पक्ष में
राज्यसभा सांसद महेंद्र सिंह माहरा और विधायक पूरन सिंह फर्त्याल का कहना है कि कोलीढेक में प्रस्तावित झील हर दृष्टि से जरूरी है। इसे स्वीकृत कराने के लिए किसी भी स्तर पर प्रयासों में कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।