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फर्स्ट-एड को तरस रहा खेतीखान अस्पताल
ब्यूरो /अमर उजाला, चंपावत
Updated Sun, 28 Jun 2015 10:29 PM IST
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काली कुमाऊं के शेर प्रख्यात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित हर्षदेव ओली, पूर्णानंद जोशी, दुर्गादत्त सहित कई सेनानियों की धरती है खेतीखान, लेकिन आजादी के 67 वर्ष बाद भी यह इलाका इलाज के लिए तरस रहा है। राजकीय एलोपैथिक अस्पताल (एसएडी) में डॉक्टर की तैनाती हो या न हो मरीजों की सेहत पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मरीजों की नब्ज डॉक्टर से ज्यादा फार्मेसिस्ट के आसरे है।
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जिला मुख्यालय से करीब 30 किमी दूर खेतीखान अस्पताल में अमर उजाला टीम शनिवार सुबह 9.31 बजे पहुंची। इस वक्त तक डॉक्टर नहीं पहुंचे थे। अस्पताल में हलचल बेहद कम थी। अलबत्ता फार्मेसिस्ट अनीता अधिकारी अपने केबिन में थीं। तभी एक मरीज रीता जुकरिया ने अस्पताल में दस्तक दी। डॉक्टर की अनुपस्थिति में मरीज देखने की जिम्मेदारी फार्मेसिस्ट ने निभाई। स्थानीय लोगों के मुताबिक मरीजों को अस्पताल में डॉक्टर से ज्यादा फार्मेसिस्ट ही अटैंड करते हैं।
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वैसे भी अस्पताल में इलाज को अधिक कुछ है नहीं। परीक्षण से लेकर किसी दूसरी तरह की सुविधा एसएडी में होती नहीं। डॉक्टर वक्त पर पहुंचते नहीं। ऐसे में ये अस्पताल फर्स्ट-एड के काम को ही ठीक से कर दे, तो लोगों की बड़ी मदद होगी।
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