{"_id":"625efe837168a916e464b808","slug":"fire-in-the-jungle-champawat-news-hld459983440","type":"story","status":"publish","title_hn":"आमड़ा, गल्लागांव, नौमाना, तड़ीगांव के जंगलों में लगी भीषण आग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आमड़ा, गल्लागांव, नौमाना, तड़ीगांव के जंगलों में लगी भीषण आग
विज्ञापन
बाराकोट के गल्लगांव के जंगलों में धधकती आग।
- फोटो : LOHAGHAT
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंपावत/लोहाघाट। मौसम में तपिश बढ़ने के साथ ही जिले मेें जंगलों में आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ने लगी हैं। रविवार देर शाम से जहां बाराकोट ब्लॉक के ग्राम पंचायत गल्लागांव, नौमाना, तडीगांव के जंगलों में आग लग गई। सीमांत आमड़ा के जगलों में लगी आग को बुझाने के लिए वन कर्मियों को 22 किमी की पैदल दूरी नापनी पड़ी। वनाग्नि की घटनाओं से वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा है।
आग की चपेट में आकर जड़ीबूटियां और छोटे-छोटे पौधे जलकर राख हो गए। जंगल में लगी आग की लपटें गल्लागांव देवली माफी मोटर मार्ग पर आने से कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ। जंगल में आग लगने से जंगली जानवर आबादी की ओर आने लगे हैं। हिंसक जानवरों का आबादी में आने का डर सताने लगा है। ग्राम प्रधान गल्ला गांव रंजीत सिंह बोहरा, प्रकाश सिंह, नवीन चंद्र जोशी, हयात राम, दिनेश चंद्र, पावज्ती देवी, हीरा देवी आदि ने बताया कि एक माह में जंगल में दूसरी बार आग की घटना हो गई है। इधर रेंजर दीप जोशी का कहना है कि जंगल में लगी आग को काबू करने के लिए वन कर्मी जुटे हुए हैं।
चंपावत मेें नहीं लगा है प्रदूषण मापने संबंधी यंत्र
चंपावत। जंगलों में लगी आग के कारण बीते कुछ दिनों मेें पर्यावरण मेें प्रदूषण का स्तर निश्चित तौर पर बढ़ा है। चंपावत जिले मेें कहीं पर भी प्रदूषण मापने संबंधी कोई यंत्र नहीं लगा है। जिला आपदा अधिकारी मनोज पांडेय के अनुसार जिले में प्रदूषण नियंत्रण संबंधी सभी कार्य हल्द्वानी स्थित पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड की ओर से किए जाते हैं। संवाद
विज्ञापन
अस्थमा रोगियों, बुजुर्गों और बच्चों को हो रही है परेशानी
चंपावत। जिले मेें चीड़ आदि के पेड़ों को आग लगने से पर्यावरण में धुआं फैल रहा है। इससे अस्थमा रोगियों, बुजुर्गों और बच्चों को सांस लेने में दिक्कतें हो रही है। इसके अलावा लोगों को आंखों मेें जलन और पानी आने की शिकायतें पेश आ रही हैं। जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. एचएस ऐरी के अनुसार बीते एक सप्ताह से वातावरण मेें वनाग्नि की धुंध फैलने और बरसात नहीं होने के कारण अस्थमा रोगियों और आंखों मेें जलन की शिकायतों वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है। संवाद
विज्ञापन
आग की चपेट में आकर जड़ीबूटियां और छोटे-छोटे पौधे जलकर राख हो गए। जंगल में लगी आग की लपटें गल्लागांव देवली माफी मोटर मार्ग पर आने से कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ। जंगल में आग लगने से जंगली जानवर आबादी की ओर आने लगे हैं। हिंसक जानवरों का आबादी में आने का डर सताने लगा है। ग्राम प्रधान गल्ला गांव रंजीत सिंह बोहरा, प्रकाश सिंह, नवीन चंद्र जोशी, हयात राम, दिनेश चंद्र, पावज्ती देवी, हीरा देवी आदि ने बताया कि एक माह में जंगल में दूसरी बार आग की घटना हो गई है। इधर रेंजर दीप जोशी का कहना है कि जंगल में लगी आग को काबू करने के लिए वन कर्मी जुटे हुए हैं।
विज्ञापन
चंपावत मेें नहीं लगा है प्रदूषण मापने संबंधी यंत्र
चंपावत। जंगलों में लगी आग के कारण बीते कुछ दिनों मेें पर्यावरण मेें प्रदूषण का स्तर निश्चित तौर पर बढ़ा है। चंपावत जिले मेें कहीं पर भी प्रदूषण मापने संबंधी कोई यंत्र नहीं लगा है। जिला आपदा अधिकारी मनोज पांडेय के अनुसार जिले में प्रदूषण नियंत्रण संबंधी सभी कार्य हल्द्वानी स्थित पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड की ओर से किए जाते हैं। संवाद
विज्ञापन
अस्थमा रोगियों, बुजुर्गों और बच्चों को हो रही है परेशानी
चंपावत। जिले मेें चीड़ आदि के पेड़ों को आग लगने से पर्यावरण में धुआं फैल रहा है। इससे अस्थमा रोगियों, बुजुर्गों और बच्चों को सांस लेने में दिक्कतें हो रही है। इसके अलावा लोगों को आंखों मेें जलन और पानी आने की शिकायतें पेश आ रही हैं। जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. एचएस ऐरी के अनुसार बीते एक सप्ताह से वातावरण मेें वनाग्नि की धुंध फैलने और बरसात नहीं होने के कारण अस्थमा रोगियों और आंखों मेें जलन की शिकायतों वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है। संवाद

चंपावत के सीमांत आमड़ा क्षेत्र में जंगल में लगी आग।- फोटो : CHAMPAWAT