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अपने जिले में डायट और प्रशिक्षण दूसरे जिले में
नवल जोशी/अमर उजाला, लोहाघाट (चंपावत)
Updated Wed, 07 Sep 2016 10:38 PM IST
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अपने जिले में डायट और प्रशिक्षण दूसरे जिले में
- फोटो : अमर उजाला
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शिक्षकों को तैयार करने वाला जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) खुद अंधेरे में है। बदहाली की वजह से यहां बीते चार साल से डीएलएड की ट्रेनिंग भी नहीं हो सकी है। इस जिले के प्रशिक्षणार्थियों को भी ट्रेनिंग के लिए दूसरे जिले पर आश्रित रहना पड़ रहा है। जरूरी सुविधाओं और संसाधनों की कमी के चलते यहां के अभ्यर्थियों को करीब 130 किमी दूर डीडीहाट की दौड़ लगानी पड़ रही है।
लोहाघाट में 2006 में स्थापित जिला संसाधन केंद्र (मिनी डायट) में शिक्षकों के अलावा बीटीसी के 200 छात्रों के एक बैच का प्रशिक्षण हुआ था। 2013 में इसको उच्चीकृत कर डायट का दर्जा दिया गया, लेकिन तबसे डायट में डीएलएड की ट्रेनिंग नहीं दी जा सकी है। चंपावत के प्रशिक्षणार्थियों को दो वर्षीय डिप्लोमा इन एलिमेंटरी एजुकेशन (डीएलएड) प्रशिक्षण के लिए डीडीहाट जाना पड़ रहा है। डायट के लिए स्वीकृत 17 प्रवक्ताओं और छह वरिष्ठ प्रवक्ताओं के पद सृजित किए गए, जिसमें से वरिष्ठ प्रवक्ताओं के सभी पद रिक्त हैं। वहीं 17 के सापेक्ष महज तीन प्रवक्ताओं के सहारे डायट का संचालन हो रहा है।
पुस्तकों की कमी, प्रयोगशाला में उपकरण नहीं
संसाधनों की कमी से डायट को राष्ट्रीय अध्यापक प्रशिक्षण परिषद (एनसीटीई) से मान्यता में भी अड़चनें आ रही है। नतीजतन संस्थान में शिक्षकों के अलावा कोई अन्य प्रशिक्षण नहीं मिल रहा है। अप्रैल 2015 को एनसीटीई की टीम ने डायट का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया था। तीन बिंदुओं पर आपत्तियां लगाई गई थी, जिसमें पुस्तकालय में पुस्तकों की कमी, प्रयोगशाला में उपकरणों की कमी तथा दो हजार वर्ग फीट हाल न होने की बात कही गई। चार माह में इन कमियों को पूरा करने को कहा गया था। प्रथम अपील में तो पुस्तकालय की कमी को तो दूर कर लिया गया था, लेकिन प्रयोगशाला उपकरणों, हाल की समस्या बनी हुई है।
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44 के सापेक्ष महज 14 कार्मिक हैं कार्यरत
डायट में मंजूर 44 पदों के सापेक्ष मात्र 14 कार्मिकों की तैनाती है। प्राचार्य, तीन प्रवक्ता, तकनीकी सहायक, संख्या सहायक, पुस्तकालय अध्यक्ष, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, प्रधान सहायक, वरिष्ठ सहायक, कनिष्ठ सहायक के अलावा तीन परिचारक कार्यरत हैं।
स्टाफ की नियुक्ति के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के अपर निदेशक से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। स्टाफ की कमी को पूरा करने का भरोसा दिलाया जाता है, लेकिन फिलहाल काफी पद रिक्त हैं। वहीं कमियों को दूर कर डायट को मान्यता दिलाने की प्रक्रिया भी चल रही है। -केसी शाक्य प्राचार्य, डायट लोहाघाट।
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लोहाघाट में 2006 में स्थापित जिला संसाधन केंद्र (मिनी डायट) में शिक्षकों के अलावा बीटीसी के 200 छात्रों के एक बैच का प्रशिक्षण हुआ था। 2013 में इसको उच्चीकृत कर डायट का दर्जा दिया गया, लेकिन तबसे डायट में डीएलएड की ट्रेनिंग नहीं दी जा सकी है। चंपावत के प्रशिक्षणार्थियों को दो वर्षीय डिप्लोमा इन एलिमेंटरी एजुकेशन (डीएलएड) प्रशिक्षण के लिए डीडीहाट जाना पड़ रहा है। डायट के लिए स्वीकृत 17 प्रवक्ताओं और छह वरिष्ठ प्रवक्ताओं के पद सृजित किए गए, जिसमें से वरिष्ठ प्रवक्ताओं के सभी पद रिक्त हैं। वहीं 17 के सापेक्ष महज तीन प्रवक्ताओं के सहारे डायट का संचालन हो रहा है।
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पुस्तकों की कमी, प्रयोगशाला में उपकरण नहीं
संसाधनों की कमी से डायट को राष्ट्रीय अध्यापक प्रशिक्षण परिषद (एनसीटीई) से मान्यता में भी अड़चनें आ रही है। नतीजतन संस्थान में शिक्षकों के अलावा कोई अन्य प्रशिक्षण नहीं मिल रहा है। अप्रैल 2015 को एनसीटीई की टीम ने डायट का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया था। तीन बिंदुओं पर आपत्तियां लगाई गई थी, जिसमें पुस्तकालय में पुस्तकों की कमी, प्रयोगशाला में उपकरणों की कमी तथा दो हजार वर्ग फीट हाल न होने की बात कही गई। चार माह में इन कमियों को पूरा करने को कहा गया था। प्रथम अपील में तो पुस्तकालय की कमी को तो दूर कर लिया गया था, लेकिन प्रयोगशाला उपकरणों, हाल की समस्या बनी हुई है।
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44 के सापेक्ष महज 14 कार्मिक हैं कार्यरत
डायट में मंजूर 44 पदों के सापेक्ष मात्र 14 कार्मिकों की तैनाती है। प्राचार्य, तीन प्रवक्ता, तकनीकी सहायक, संख्या सहायक, पुस्तकालय अध्यक्ष, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, प्रधान सहायक, वरिष्ठ सहायक, कनिष्ठ सहायक के अलावा तीन परिचारक कार्यरत हैं।
स्टाफ की नियुक्ति के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के अपर निदेशक से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। स्टाफ की कमी को पूरा करने का भरोसा दिलाया जाता है, लेकिन फिलहाल काफी पद रिक्त हैं। वहीं कमियों को दूर कर डायट को मान्यता दिलाने की प्रक्रिया भी चल रही है। -केसी शाक्य प्राचार्य, डायट लोहाघाट।