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Champawat News: बिशंग के प्रसिद्ध कड़ाई देवी मंदिर में देव डांगरों ने खाई दूध और अक्षत की गाल
Sat, 12 Oct 2024 11:13 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Sat, 12 Oct 2024 11:13 PM IST
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लोहाघाट में बिशंग के कड़ाई देवी मंदिर में अवतरित होते देव डांगर। संवाद
लोहाघाट (चंपावत)। बिशंग क्षेत्र के प्रसिद्ध मां कड़ाई मंदिर व सुईं पऊ के प्रसिद्ध गलचौड़ा बाबा मंदिर में दशहरे के दिन देव डांगरों ने अवतरित होकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। कड़ाई मंदिर में देव डांगरों ने दूध, अक्षत की गाल खाई।
मंदिर के पुजारी ने देव डांगरों को वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच गाल दी। उधर गलचौड़ा बाबा मंदिर में बीस गांव बिशुंग व पांच गांव सुईं के देव डांगर पहुंचे। मन्नतें पूरी होने पर श्रद्धालुओं ने बेताल को दूध व अक्षत का भोग लगाया। देव डांगरों ने अवतरित होकर लोगों के कष्टों का निवारण किया। इधर बाराकोट के ग्राम सभा इजडा के भूमिया मंदिर में देर शाम देव डांगरों ने अवतरित होकर गाल खाई। बाद में देव डांगर अवतरित होकर भगवती मंदिर पहुंचे वहां देव गद्दी लगा कर लोगों का दुख निवारण किया गया। इस दौरान यहां भंडारा आयोजित हुआ। इसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इधर नेपाल सीमा से लगे ठाटा गांव से देवी रथ को किमतोली भगवती मंदिर लाया गया। रथ में सवार देव डांगरों ने भक्तों को आशीर्वाद दिया। मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ मेले का समापन हो गया। संवाद
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मंदिर के पुजारी ने देव डांगरों को वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच गाल दी। उधर गलचौड़ा बाबा मंदिर में बीस गांव बिशुंग व पांच गांव सुईं के देव डांगर पहुंचे। मन्नतें पूरी होने पर श्रद्धालुओं ने बेताल को दूध व अक्षत का भोग लगाया। देव डांगरों ने अवतरित होकर लोगों के कष्टों का निवारण किया। इधर बाराकोट के ग्राम सभा इजडा के भूमिया मंदिर में देर शाम देव डांगरों ने अवतरित होकर गाल खाई। बाद में देव डांगर अवतरित होकर भगवती मंदिर पहुंचे वहां देव गद्दी लगा कर लोगों का दुख निवारण किया गया। इस दौरान यहां भंडारा आयोजित हुआ। इसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इधर नेपाल सीमा से लगे ठाटा गांव से देवी रथ को किमतोली भगवती मंदिर लाया गया। रथ में सवार देव डांगरों ने भक्तों को आशीर्वाद दिया। मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ मेले का समापन हो गया। संवाद
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