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ग्रेड पे को लेकर समाधान पोर्टल में शिकायत करने वालों का जवाब तलब
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चंपावत। जिले में पुलिस के छह जवानों ने 4600 ग्रेड पे के लिए समाधान पोर्टल में शिकायत दर्ज कराई थी। अब शिकायती पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो रहे हैं। इसका संज्ञान लेकर एसपी देवेंद्र पिंचा ने सभी छह कर्मचारियों का जवाब तलब किया है। इस दौरान सभी छह जवानों ने आगे से इस तरह का कार्य न करने की बात कही। उनकी काउंसलिंग भी की गई।
एसपी देवेंद्र पिंचा ने बताया कि समाधान पोर्टल से पत्र कैसे वायरल हुए इसकी भी जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि सभी को समझाया गया है। संबंधित कार्मिकों का कहना है कि आगे से इस तरह की हरकत नहीं करेंगे। उत्तराखंड पुलिस के सिपाहियों के पहले बैच को 4600 ग्रेड पे नहीं मिलेगा। इसके स्थान पर अब उन्हें दो लाख रुपये एकमुश्त दिए जाएंगे।
गृह विभाग ने मुख्यमंत्री की इस घोषणा में आंशिक परिवर्तन कर शुक्रवार को आदेश जारी किए थे। इस आदेश के बाद पुलिस परिजनों में नाराजगी बढ़ गई थी। पुलिस विभाग में इसके खिलाफ बगावत के सुर उठने लगे थे। सोशल मीडिया पर सिपाहियों के इस्तीफे और वीआरएस के पत्र वायरल हो रहे हैं।
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डीजीपी ने अक्तूबर में दिया था आश्वासन
चंपावत। उत्तराखंड पुलिस में सबसे पहले वर्ष 2001 में भर्ती हुई थी। इस बैच के सिपाहियों को 20 साल की सेवा के बाद 4600 ग्रेड पे दिलाने की बात कही गई थी। वर्ष 2021 में उन्हें 20 साल का समय हुआ तो सिपाहियों ने इसकी मांग शुरू की। सोशल मीडिया पर आंदोलन शुरू हुआ और फिर उनके परिजनों ने धरातल पर भी इस आंदोलन को उतार दिया। कई चरणों में चले आंदोलन के बाद अक्तूबर में शासन और फिर डीजीपी ने भी आश्वासन दिया था।
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एसपी देवेंद्र पिंचा ने बताया कि समाधान पोर्टल से पत्र कैसे वायरल हुए इसकी भी जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि सभी को समझाया गया है। संबंधित कार्मिकों का कहना है कि आगे से इस तरह की हरकत नहीं करेंगे। उत्तराखंड पुलिस के सिपाहियों के पहले बैच को 4600 ग्रेड पे नहीं मिलेगा। इसके स्थान पर अब उन्हें दो लाख रुपये एकमुश्त दिए जाएंगे।
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गृह विभाग ने मुख्यमंत्री की इस घोषणा में आंशिक परिवर्तन कर शुक्रवार को आदेश जारी किए थे। इस आदेश के बाद पुलिस परिजनों में नाराजगी बढ़ गई थी। पुलिस विभाग में इसके खिलाफ बगावत के सुर उठने लगे थे। सोशल मीडिया पर सिपाहियों के इस्तीफे और वीआरएस के पत्र वायरल हो रहे हैं।
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डीजीपी ने अक्तूबर में दिया था आश्वासन
चंपावत। उत्तराखंड पुलिस में सबसे पहले वर्ष 2001 में भर्ती हुई थी। इस बैच के सिपाहियों को 20 साल की सेवा के बाद 4600 ग्रेड पे दिलाने की बात कही गई थी। वर्ष 2021 में उन्हें 20 साल का समय हुआ तो सिपाहियों ने इसकी मांग शुरू की। सोशल मीडिया पर आंदोलन शुरू हुआ और फिर उनके परिजनों ने धरातल पर भी इस आंदोलन को उतार दिया। कई चरणों में चले आंदोलन के बाद अक्तूबर में शासन और फिर डीजीपी ने भी आश्वासन दिया था।