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छोड़ बेर सब कामकाज, पाणि लूनि रत्ती, दोपहर और सांझ
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पम्दा गांव में पानी के लिए दौड़ लगाती नन्हीं स्कूली बच्ची सोनी।फोटो: संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। पूरे एक माह से बाराकोट के पम्दा गांव के लोग पानी के लिए तरस गए हैं। यहां के लोगों को प्यास बुझाने के लिए इधर-उधर नौले और गधेरों की शरण लेनी पड़ रही है। बड़े-बुजुर्गों के साथ ही छोटे बच्चे भी पानी के लिए दौड़ लगाने के लिए मजबूर हैं। बुजुर्गों का कहना है कि ‘पुर परिवार सब कामकाज छोड़ि बेर रत्ती, दोपहर और सांझ नौल-गधेरो बटी पाणि व्यवस्था करने में रूं।’
पम्दा गांव की पेयजल योजना 17 अक्तूबर को आई आपदा में क्षतिग्रस्त हो गई थी। एक महीना बीत जाने के बाद भी योजना को ठीक नहीं किया जा सकता है। परेशानहाल लोगों ने बृहस्पतिवार को पम्दा में खाली बर्तनों के साथ प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि पानी के लिए 100 से 600 मीटर दूर तक जाना उनकी मजबूरी बन गई है। ग्रामीणों ने सोमवार तक पेयजल आपूर्ति सुचारु नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। वहां मीना जोशी, लक्ष्मी जोशी, पार्वती जोशी, जगदीश चंद्र, ललित मोहन जोशी, चंद्रशेखर आदि शामिल थे। बता दें कि आपदा में जिले की 209 पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हुई थी। पेयजल विभाग का दावा है कि तीन को छोड़ शेष योजनाओं को ठीक करा लिया गया है।
आपदा की मार के बाद यहां के लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। लेकिन अनेकों बार आवाज उठाने पर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। - बबीता जोशी, पम्दा।
गांव के लोगों को पेयजल की आपूर्ति के लिए 300 मीटर दूर नौले तक जाना पड़ रहा है। इस पर रोज दो घंटे से ज्यादा वक्त लग रहा है। - रूकमणि जोशी, पम्दा।
गांव में पानी रोजमर्रा की जरूरत के लिए तो चाहिए ही, लेकिन सबसे ज्यादा जरूरत मवेशियों के लिए है। इस वजह से परेशानी और बढ़ रही है। - हेमा देवी, पम्दा।
पेयजल की कमी को पिकअप और दूसरे वैकल्पिक माध्यमों से पूरा करने का विभाग का दावा गलत है। लोग खुद ही दूरदराज से पानी ढोने को मजबूर हैं। - खीमा देवी, पम्दा।
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पम्दा पेयजल योजना 20 किमी से अधिक लंबी है। योजना अनेकों जगह क्षतिग्रस्त थी। इसे ठीक कराया जा रहा है। करीब 16 किमी लाइन ठीक कर ली गई है। बाकी बचा काम तीन दिन में पूरा होने की उम्मीद है। ईई ने दावा किया कि काम चलाने के लिए पिकअप से पानी की आपूर्ति के प्रयास किए गए हैं। - वीके पाल, ईई, जल निगम।
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पम्दा गांव की पेयजल योजना 17 अक्तूबर को आई आपदा में क्षतिग्रस्त हो गई थी। एक महीना बीत जाने के बाद भी योजना को ठीक नहीं किया जा सकता है। परेशानहाल लोगों ने बृहस्पतिवार को पम्दा में खाली बर्तनों के साथ प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि पानी के लिए 100 से 600 मीटर दूर तक जाना उनकी मजबूरी बन गई है। ग्रामीणों ने सोमवार तक पेयजल आपूर्ति सुचारु नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। वहां मीना जोशी, लक्ष्मी जोशी, पार्वती जोशी, जगदीश चंद्र, ललित मोहन जोशी, चंद्रशेखर आदि शामिल थे। बता दें कि आपदा में जिले की 209 पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हुई थी। पेयजल विभाग का दावा है कि तीन को छोड़ शेष योजनाओं को ठीक करा लिया गया है।
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आपदा की मार के बाद यहां के लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। लेकिन अनेकों बार आवाज उठाने पर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। - बबीता जोशी, पम्दा।
गांव के लोगों को पेयजल की आपूर्ति के लिए 300 मीटर दूर नौले तक जाना पड़ रहा है। इस पर रोज दो घंटे से ज्यादा वक्त लग रहा है। - रूकमणि जोशी, पम्दा।
गांव में पानी रोजमर्रा की जरूरत के लिए तो चाहिए ही, लेकिन सबसे ज्यादा जरूरत मवेशियों के लिए है। इस वजह से परेशानी और बढ़ रही है। - हेमा देवी, पम्दा।
पेयजल की कमी को पिकअप और दूसरे वैकल्पिक माध्यमों से पूरा करने का विभाग का दावा गलत है। लोग खुद ही दूरदराज से पानी ढोने को मजबूर हैं। - खीमा देवी, पम्दा।
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पम्दा पेयजल योजना 20 किमी से अधिक लंबी है। योजना अनेकों जगह क्षतिग्रस्त थी। इसे ठीक कराया जा रहा है। करीब 16 किमी लाइन ठीक कर ली गई है। बाकी बचा काम तीन दिन में पूरा होने की उम्मीद है। ईई ने दावा किया कि काम चलाने के लिए पिकअप से पानी की आपूर्ति के प्रयास किए गए हैं। - वीके पाल, ईई, जल निगम।