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Champawat News: घटोत्कच महोत्सव का कलश यात्रा के साथ शुभारंभ

Fri, 11 Oct 2024 12:15 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत Updated Fri, 11 Oct 2024 12:15 AM IST
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Cultural programme in district.
चंपावत। जिला मुख्यालय से चार किमी दूर चौकी में घटोत्कच महोत्सव का शुभारंभ हो गया है। महोत्सव का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ हुआ। महिलाओं और बच्चों ने मोस्टा से मंदिर परिसर तक कलश यात्रा निकाली। इस दौरान बच्चों ने कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी दी। इस दौरान महोत्सव में विभिन्न विभागों के स्टाल लगाकर योजनाओं की जानकारी दी गई। स्वास्थ्य विभाग ने स्टाल लगाकर लोगों की जांच कर दवा दी।
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बृहस्पतिवार को मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष ज्योति राय ने घटकू मंदिर में पूजा अर्चना कर महोत्सव का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव क्षेत्र की संस्कृति की पहचान है। इन महोत्सव के आयोजनों से हमारी लोक संस्कृति के इतिहास की जानकारी मिलती है। उन्होंने संस्कृति को संजोये रखने के लिए महोत्सव समिति की सराहना की। हालांकि महोत्सव प्रथम नवरात्र से शुरू होता है, लेकिन अंतिम दिन इसमें रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन होता है। स्थानीय और बाहरी व्यापारियों ने कपड़े, जूते समेत कई तरह के उत्पादों की दुकानें लगाई। इसके अलावा बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले भी लगाए गए।
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देर शाम स्टार नाइट में स्थानीय और बाहरी कलाकार रंगारंग कार्यक्रमों की प्रस्तुति देंगे। महोत्सव समिति अध्यक्ष मनमोहन सिंह बोहरा और संयोजक भुवन चंद्र जोशी ने सभी का आभार जताया। इस दौरान विधायक प्रतिनिधि प्रकाश तिवारी, भाजपा जिलाध्यक्ष निर्मल माहरा, ब्लाक प्रमुख चंपावत रेखा देवी, व्यापार संघ अध्यक्ष विकास साह, गोविंद सामंत, मुकेश कलखुड़िया, गौरव पांडेय आदि मौजूद रहे।
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भीम के पुत्र घटोत्कच का यहां हुआ था वध
चंपावत। घटकू मंदिर का संबंध महाबली भीम के पुत्र घटोत्कच से है। घटोत्कच महाबली भीम और राक्षसी हिडंबा का पुत्र था। शिवजी के गण घटोत्कच का महाभारत युद्ध में धनुर्धारी कर्ण ने वध किया था। पौराणिक मान्यता के अनुसार चंपावत के चौकी गांव के पास घटोत्कच का सिर गिरा था। इसलिए इस स्थान पर घटकू का मंदिर स्थापित किया गया है। यहां पांडवों ने घटोत्कच का तर्पण किया था और अज्ञात वास के दौरान यहां रहे थे। इस मंदिर में 33 करोड़ देवी-देवता वास करते हैं। हर घर का ईष्ट भी यहां पूजा जाता है। महोत्सव समिति सचिव इंदुवर जोशी ने बताया कि यहां पर पहले बलि प्रथा होती थी। यहां के महत्व को प्रसारित करने का काम महोत्सव के माध्यम से किया जाता है। इससे क्षेत्र की अलग पहचान है।
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