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सात साल से बंद है जिला अस्पताल की आवासीय कॉलोनी का काम

Sat, 15 Dec 2018 10:30 PM IST
kamlesh kamlesh अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत Published by: kamlesh kamlesh Updated Sat, 15 Dec 2018 10:30 PM IST
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construction incomplete since 7 yrs
चंपावत जिला अस्पताल परिसर में लंबे समय से लटकी डॉक्टरों की आवासीय कॉलोनी। - फोटो : AMAR UJALA
जिला अस्पताल के डॉॅक्टरों और अन्य स्टाफ के लिए आवासीय व्यवस्था लचर है। आवासीय कॉलोनी का काम सात साल से बंद है। आवास नहीं होने से डॉक्टर और अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ को अस्पताल से दूर किराए के आवास पर रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। इस दूरी का असर इमरजेंसी सेवा पर पड़ रहा है। इसके साथ ही देरी के चलते निर्माण में लागत से 353 लाख रुपये अधिक लग रहा है।
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जिला अस्पताल में इस वक्त 15 डॉक्टरों सहित कुल 45 कर्मी हैं मगर इनमें से अधिकांश के लिए आवास की व्यवस्था नहीं है। कॉलोनी का निर्माण अधूरा रहने से डॉक्टर अस्पताल से दूर रह रहे हैं। इससे अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर काफी असर पड़ रहा है। इमरजेंसी के दौरान डॉक्टर तत्काल नहीं आ पाते। अस्पताल आने में समय जाया होता है।
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वहीं आवास के लिए समय पर धन नहीं मिलने से न केवल निर्माण कार्य में देरी हो रही है, बल्कि लागत में अधिक धन लग रहा है। निर्माणदायी संस्था उप्र राजकीय निर्माण निगम का कहना है कि 401.52 लाख रुपये से बनने वाली आवासीय कॉलोनी की लागत बढ़कर 754.22 लाख हो चुकी है। निर्माण की लागत में 353 लाख रुपये अधिक बढ़ गया है। पिछले सप्ताह डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय ने मौका मुआयना कर बजट के लिए पत्र भेजने के प्रभारी मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. एचएस ऐरी को निर्देश दिए।
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जिला प्लान से पूरे हुए चार आवास
अगस्त 2008 से राज्य सेक्टर से शुरू हुए आवासीय काम में 180.14 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। इसके बाद अधूरे पड़े चार आवासों के लिए 2016 में जिला प्लान से 50 लाख रुपये दिए गए। इस रकम से एक आवासीय ब्लॉक के चार आवासों को इस साल जरूर पूरा करा लिया गया।


डीएम के निर्देश के बाद संशोधित आगणन तैयार करने का लोक निर्माण विभाग से आग्रह किया गया है। आगणन आने के बाद बजट के लिए शासन से मांग की जाएगी। आवासीय कॉलोनी का काम अधूरा रहने से डॉक्टर दूर रहने को मजबूर हैं। अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी इसका असर पड़ रहा है।
- डॉ. आरपी खंडूरी, सीएमओ, चंपावत।
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