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दावा 130 का, धरातल में बने हैं महज चार डंपिंग जोन 

Thu, 07 Dec 2017 11:03 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत। Updated Thu, 07 Dec 2017 11:03 PM IST
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Claims 130 are made in the ground, just four dumping zones
राष्ट्रीय राजमार्ग में स्वाला के समीप खाई में मलवा फेंकती जेसीबी। - फोटो : अमर उजाला
 बारहमासी सड़क (ऑल वैदर रोड) के निर्माण के दौरान नियमों की जमकर अनदेखी हो रही है। हाल यह है कि सड़क निर्माण के दौरान निकल रहे मलबे को मशीनों के जरिए सीधे खाई की तरफ फेंका जा रहा है। इससे बांज, काफल, चीड़, उतीस के पेड़ों व अन्य वनस्पतियों को नुकसान हो रहा है। विभाग की ओर से दावा तो मलबा निस्तारण के लिए 130 डंपिंग जोन बनाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन धरातल पर मात्र चार ही डंपिंग जोन बनाए गए हैं।  
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 पिथौरागढ़ से टनकपुर के बीच इन दिनों बारहमासी सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है। सड़क निर्माण में नियमों को ताख में रखा जा रहा है।  नियम मुताबिक सड़क के कटान के दौरान निकले मलबे को डंपिंग जोन में निस्तारित करना है, लेकिन  डंपिंग जोन में मलबा डालने के बजाय सीधे खाई में फेंका जा रहा है। 
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 कहने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) खंड का दावा है कि चंपावत से टनकपुर बीच 130 डंपिंग जोन बनाए गए हैं। जमीनी हकीकत यह है इस हिस्से में बनलेख, चल्थी में एक-एक, सूखीढ़ांग में दो जगहों  समेत कुल चार डंपिंग जोन बनाए हुए दिख रहे हैं। बनलेख के समीप ताड़केश्वर में सड़क निर्माण के दौरान पहाड़ी से निकले मलबे को सीधे खाई में फेंका जा रहा है। इससे बहुमूल्य वनस्पति को तो नुकसान पहुंच ही रहा है, साथ ही नदी भी प्रदूषित हो रही है।  ऐसा ही हाल बनलेख, धौन, स्वाला के पास हो रहे सड़क निर्माण का भी है। 
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कोट
चंपावत से टनकपुर के बीच 130 डंपिंग जोन बना लिए गए हैं। डंपिंग जोन बनाए जाने का क्रम जारी है। काम करने वाली कंपनियों को मलबे को डंपिंग जोन में डालने के निर्देश दिए गए हैं। मलबे को खाई में डालने की शिकायत मिलने पर मौका मुआयना कर संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
एलडी मथेला, अधिशासी अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग खंड।
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